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कब जलेगी होलिका और क्या है ग्रहण का समय, जानिए कब मनेगी होली

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 2, 2026, 12:22:32 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): फाल्गुन पूर्णिमा पर इस बार होली का पर्व खास संयोग लेकर आया है. वर्ष 2026 में होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और रंगों की होली अलग-अलग तिथियों पर पड़ रहे हैं, जिससे लोगों के मन में मुहूर्त और नियमों को लेकर उत्सुकता बनी हुई है. परंपरागत पंचांग गणनाओं के अनुसार 2 मार्च 2026, सोमवार की रात होलिका दहन किया जाएगा. इसके अगले दिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगेगा, जबकि रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी.

कब जलेगा अगजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा समाप्त होने के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है. हालांकि इस वर्ष स्थिति थोड़ी अलग है, क्योंकि 2 मार्च की शाम 5 बजकर 18 मिनट से पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है और उसी समय से भद्रा भी लग जा रही है. भद्रा 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगी. ऐसे में पूरी रात पूर्णिमा और भद्रा एक साथ रहेंगी.

शास्त्रों में कहा गया है कि यदि भद्रा पूरी रात रहे तो उसके ‘पुच्छ’ भाग में दहन करना शुभ होता है. इसी आधार पर 2 मार्च की मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 02 मिनट तक का समय होलिका दहन के लिए उपयुक्त माना गया है. यह कुल 1 घंटा 12 मिनट का मुहूर्त है. इसी दौरान विधि-विधान से अगजा जलाना शुभ फलदायी माना गया है.

होलिका दहन का धार्मिक महत्व
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद की आस्था की रक्षा हुई और अहंकार का अंत हुआ. इसी संदेश को याद करते हुए लोग अग्नि की परिक्रमा करते हैं, परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं और नई फसल की बालियां सेंकते हैं. कई स्थानों पर महिलाएं कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं. दहन के बाद राख को भी शुभ मानकर घर या खेत में रखा जाता है.

क्या है चंद्र ग्रहण का समय?
होलिका दहन के अगले दिन 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा. पंचांग के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा अंतर संभव है. ग्रहण के कारण सूतक काल सुबह लगभग 6 बजकर 20 मिनट से प्रभावी माना जाएगा, जो ग्रहण समाप्ति तक रहेगा.

सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ, भोजन पकाने जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता के साथ-साथ यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना भी है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आते हैं.

कब मानेगी रंगों की होली?
चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को रंग खेलने से परहेज किया जाएगा. इसलिए इस वर्ष रंगभरी होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. इस तरह पहले 2 मार्च की रात अगजा जलेगा, 3 मार्च को ग्रहण के नियमों का पालन होगा और 4 मार्च को उत्साह और उमंग के साथ रंगों का त्योहार मनाया जाएगा. इस विशेष संयोग के कारण इस बार होली का पर्व तीन दिनों में विभाजित नजर आएगा, जहां परंपरा, आस्था और खगोलीय घटना का अनूठा मेल देखने को मिलेगा.

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