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जब जेएन टाटा ने जंगल के बीच बसाया जमशेदपुर, ऐसे शुरू हुई टाटा स्टील की कहानी

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 10, 2026, 12:37:48 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज जमशेदपुर को “मिनी मुंबई” और “स्टील सिटी” के नाम से जाना जाता है.यहां बड़े-बड़े मॉल, चौड़ी सड़कें, आधुनिक सुविधाएं और बेहतरीन लाइफस्टाइल देखने को मिलता है लेकिन इस शहर को यहां तक पहुंचाने के पीछे टाटा स्टील के संस्थापक जेएन टाटा और टाटा परिवार की वर्षों की मेहनत और दूरदर्शिता छिपी हुई है.आज भले ही जमशेदपुर विश्वभर में अपनी पहचान बना चुका हो, लेकिन एक समय ऐसा था जब यहां सिर्फ घने जंगल और छोटे-छोटे गांव हुआ करते थे.

छोटे छोटे जंगल के टुकड़ों में बंटा था इलाका

करीब 100 साल पहले यह इलाका पूरी तरह जंगलों से घिरा हुआ था, लेकिन जेएन टाटा ने एक ऐसा सपना देखा जिसने इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी. यही सपना आगे चलकर Tata Steel और आधुनिक जमशेदपुर की पहचान बना.19वीं सदी के आखिर में जेएन टाटा भारत को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाना चाहते थे.उनका मानना था कि देश के विकास के लिए अपना इस्पात उद्योग होना बेहद जरूरी है. इसी सोच के साथ उन्होंने भारत में स्टील प्लांट लगाने की योजना बनाई.इसके लिए ऐसी जगह की तलाश शुरू हुई जहां लौह अयस्क, कोयला और पानी आसानी से उपलब्ध हो सके.

1907 में हुई टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी यानी टिस्को की स्थापना 

कई इलाकों का सर्वे करने के बाद वर्तमान झारखंड के साकची इलाके को चुना गया. उस समय यह इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था और यहां आदिवासी समुदाय के लोग रहते थे. पास में स्वर्णरेखा और खरकई नदी बहती थी, जिससे पानी की जरूरत पूरी हो सकती थी. वहीं आसपास लौह अयस्क और कोयले की भी पर्याप्त उपलब्धता थी.साल 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी यानी टिस्को की स्थापना हुई, जिसे आज टाटा स्टील के नाम से जाना जाता है. हालांकि जेएन टाटा अपने इस सपने को पूरा होते नहीं देख सके, लेकिन उनके बेटों और सहयोगियों ने इस मिशन को आगे बढ़ाया.धीरे-धीरे यहां स्टील प्लांट तैयार हुआ और मजदूरों के लिए घर, सड़क, अस्पताल और स्कूल भी बनाए गए.उस दौर में जमशेदपुर देश के सबसे आधुनिक और व्यवस्थित शहरों में गिना जाने लगा.

 काफी व्यवस्थित तरीके से की गई शहर की प्लानिंग

जेएन टाटा चाहते थे कि यह शहर सिर्फ उद्योग तक सीमित न रहे, बल्कि यहां रहने वाले लोगों को बेहतर जिंदगी भी मिले. यही वजह है कि शहर की प्लानिंग काफी व्यवस्थित तरीके से की गई.बाद में भारत के वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने इस शहर का नाम जमशेदजी टाटा के सम्मान में “जमशेदपुर” रखा.आज जमशेदपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक विकास और जेएन टाटा की दूरदर्शिता की मिसाल बन चुका है.

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