टीएनपी डेस्क (TNP DESK): हर साल की तरह इस बार भी होली और होलिका दहन की तिथियों को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई लोग एक ही दिन दोनों पर्व मानने की बात कर रहे हैं, तो कुछ अलग-अलग तारीख बता रहे हैं. ऐसे में आइए समझते हैं कि पंचांग के अनुसार इस वर्ष त्योहार कब और कैसे मनाया जाएगा.
परंपरा के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि में किया जाता है, जबकि रंगों की होली चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है. इस वर्ष पंचांग गणना के मुताबिक पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च, सोमवार की शाम 5 बजकर 18 मिनट से हो रहा है और यह 3 मार्च, मंगलवार को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी.
2 मार्च की शाम से ही भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा, जो देर रात 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. शास्त्रों में भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है. इसलिए विद्वान आचार्यों के अनुसार भद्रा के पुच्छ काल यानी रात 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट के बीच होलिका दहन किया जाएगा.
3 मार्च को दिनभर पूर्णिमा तिथि रहने के कारण उस दिन रंगों की होली नहीं मनाई जाएगी. चूंकि 4 मार्च, बुधवार को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि रहेगी, इसलिए रंगोत्सव इसी दिन मनाया जाएगा.
इस प्रकार इस वर्ष होली का उत्सव तीन दिन तक प्रभावी रहेगा, 2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को पूर्णिमा का प्रभाव और 4 मार्च को रंगों की होली.
इसके अलावा 3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण भी लग रहा है. ग्रहण का स्पर्श शाम 6 बजे और मोक्ष 6 बजकर 48 मिनट पर होगा. हालांकि यह चंद्रग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा.
