टीएनपी डेस्क(TNP DESK):एक समय था जब लोग माता-पिता के लिए जान दे देते थे, लेकिन आज का समय था जब लोग धन, दौलत और स्वार्थ की लालच में माता-पिता की जान ले लेते है.दरअसल इन सभी के पीछे प्रॉपर्टी का विवाद होता है. जब दो या तीन भाई होते हैं तो उन्हें लगता है कि प्रॉपर्टी में तीन हिसाब लग जाएगा इसलिए जिनके मन में बेईमानी होती है वह माता-पिता को धोखे से जबरदस्त से या गाली-गालौज और धमकी देकर प्रॉपर्टी अपने नाम करने की कोशिश करते है.जो कानून की नजर में सरासर गलत है अगर कोई अपने माता-पिता को धमकाकर बहला-फुसलाकर, धोखे से संपत्ति अपने नाम करने की कोशिश कर रहा है तो माता-पिता इसके खिलाफ कोर्ट में जा सकते है और बेटे को जेल की हवा भी खिला सकते है.
कानून की जानकारी हर माता-पिता के लिए जरूरी
कलयुग के इस दौर में माता-पिता और संतान के बीच का रिश्ता भी कलंकित हो चुका है. लोग संपत्ति की लालच में बेटे या बेटियां धोखे से या किसी भी तरह से संपत्ति अपने नाम करवा लेते है और माता-पिता को घर से बाहर निकाल देते है.जिसके बाद बुजुर्ग माता-पिता दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर करते है तो वही अनाथ आश्रम में रहने को मजबूर करते है. आपके साथ ऐसा कुछ ना हो इसके लिए आपको इस कानून की जानकारी जरूर होनी चाहिए.
सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत करवायें मामला दर्ज
आज हम आपको बताने वाले है कि अगर आपके भी बेटे आपकी प्रॉपर्टी अपने नाम लेने के लिए धमकी दे रहे है मारपीट कर रहे है,गाली दे रहे है तो आपको क्या करना चाहिए.यदि आपके साथ भी ऐसी कोई स्थिति बनती है तो आपको सबसे पहले अपने नजदिकी थाने में जाकर आरोपी बेटे या बेटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए.ऐसे मामले में सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत मामला दर्ज होता है.यदि माता पिता चाहे तो अपने बेटे को संपत्ति से बेदखल भी कर सकते है, इसके साथ ही ट्रांसफर की गई है सारी संपत्ति को वापस लेने के लिए SDM को आवेदन दे सकते है.
सारे सबूत को संभाल कर रखें
यदि आपको फोन के जरीये मैसेज करके या किसी भी अन्य तरीके से संपत्ती अपने नाम लेने के लिए धमकी दी जा रही है तो आपको उसका रिकॉर्ड संभाल कर रखना है.कोर्ट में यह एक अहम सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है.और आरोपी बेटे को जेल की हवा भी खिलाई जा सकती है.यदि आप सीनियर सिटीजन एक्ट 2007के तहत कोर्ट में मामला दर्ज करते है तो इसका मतलब यह होता है कि बेटे ने सेवा की एवज में जो संपत्ति अपने नाम करवाई थी, अब वह अपनी सेवा करने से मुकर रहा है इसलिए आप अपनी संपत्ति वापस ले सकते है.
आरोपी को हो सकती है 3 से 6 महीने तक की सजा
यदि सारी संपत्ति माता-पिता की कमाई की है तो वह किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम पर अपनी संपत्ति का ट्रांसफर करा सकते है.और अपने बेटे को अपनी संपत्ति से बेदाखल कर सकते है.इस तरह हर एक परेशानी से निपटने के लिए भारत के कानून में प्रावधान दिया गया है इसलिए उत्पीडन को कभी बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.यदि इस मामले में आरोप सही साबित होते है तो आरोपी बेटे को 3 से 6 महीने तक की सजा और 10000 तक का जुर्मना लगाया जाता है.
