✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. Trending

क्या है आज के झारखंड का चुनावी माहौल, किसकी डूबेगी नईयां और किसकी लगेगी पार, जानिए अबतक कितनी बदली चुनाव की तस्वीर

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: February 19, 2026, 2:25:46 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड की राजधानी रांची में नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी लगातार देखने को मिल रही है. 53 वार्ड वाले रांची नगर निगम में मेयर और पार्षदों के चुनाव के लिए 23 फरवरी 2026 को मतदान होना है. वहीं 27 फरवरी को मतगणना होगी. ऐसे में भले ही यह चुनाव तकनीकी रूप से दलीय आधार पर नहीं हो, लेकिन जमीनी हकीकत किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं दिख रही है. सभी पार्टियां अब खुले मैदान में तर कर समर्थित प्रत्याशियों के लिए वोट मांग रहे हैं. ऐसे में इन दिनों चुनावी मैदान का नजारा कुछ अलग ही देखने को मिल रहा है. 

इतिहास से आज तक कैसे बदला चुनावी चेहरा
संयुक्त बिहार के दौर में रांची और डोरंडा नगर परिषद को मिलाकर रांची नगर निगम का गठन हुआ था. 1986 में हुए पहले चुनाव में 37 वार्ड थे. उस समय चुनाव बेहद सादगीपूर्ण और कम खर्चीले होते थे. उस दौरा में 1,000-1,500 रुपये में चुनाव लड़ा जा सकता था. प्रचार दीवार लेखन और घर-घर संपर्क तक ही सीमित था.

हालांकि आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. सोशल मीडिया कैंपेन, बैनर-पोस्टर और संगठित प्रचार टीमों के बिना चुनाव की कल्पना नहीं की जा सकती. 2011 की जनगणना के बाद परिसीमन हुआ और अब वार्डों की संख्या 53 है. निगम की आय भी 13 करोड़ से बढ़कर लगभग 100 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. सड़कों का चौड़ीकरण, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था में तकनीकी सुधार हुए हैं, लेकिन चुनावी खर्च भी कई गुना बढ़ गया है.

पहले 37 पार्षदों में सिर्फ दो महिलाएं थीं, लेकिन अब 50 प्रतिशत आरक्षण के कारण महिला प्रतिनिधित्व मजबूत हुआ है. उर्मिला यादव जैसी पार्षदों ने HEC जैसे क्षेत्रों के लिए फंडिंग सुनिश्चित कराने को लेकर संघर्ष किया और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दिलाई.

दलीय समर्थन से गरमाई सियासत
इन दिनों भले ही बैलेट पेपर पर पार्टी के चुनाव चिह्न नहीं होंगे, लेकिन भाजपा, कांग्रेस और झामुमो खुलकर अपने समर्थित उम्मीदवारों के पीछे खड़े हैं और यहीं वजह है की दलीय आधार पर चुनाव ना होने के बावजूद भी यह चुनाव कहीं ना कहीं nda बनाम महागठबंध जैसी होती नज़र आ रही है. 

बात करें भारतीय जनता पार्टी की तो भाजपा ने प्रमंडलवार प्रभारी नियुक्त कर चुनाव को गंभीरता से लिया है. वहीं नगर निगम क्षेत्रों में भी विधायक से लेकर केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व सक्रिय नज़र आ रहा है. साथ ही बगावत करने वालों को शोकॉज नोटिस भी जारी हुए हैं.

इसके अलावा कांग्रेस ने जिला स्तर पर मंथन के बाद उम्मीदवारों को समर्थन दिया है. मंत्रियों और प्रदेश नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपी गई है. यहाँ तक की बागियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई है.

वहीं झामुमो की कमान खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संभाल रहे हैं. वार्ड स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट, सामाजिक समीकरण और रणनीतिक समर्थन के जरिए पार्टी मजबूती से मैदान में नज़र आ रही है.

राज्य में इस बार मुकाबला सिर्फ वार्ड स्तर का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी बन चुका है. अब देखना दिलचस्प होगा की “शहर सरकार” किसके हाथों में जाती है और जनता किसे विकास की कमान सौंपती है.

Tags:nagar nikay chunavnagar nigamnagar nigam chunav jharkahndnagar nikay chunav jharkhandranchi nagar nigamdhanbad nagar nigamnagar nikaynagar palikanagar parishadward parshadranchi nagar nigam chunavnagar nikay electionranchi nagar nigam electionlatest updatebig updatebig newstop newstrending news

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.