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महाकुंभ में स्नान ध्यान के पीछे क्या है मान्यता ? बुजुर्गों से ज्यादा युवाओं में क्रेज, पढ़ें साधु संतों की इस पर क्या है राय

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 5:45:58 AM

महाकुंभ (MAHA KUMBH) :इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर भी महाकुंभ मेला ट्रेंड कर रहा है. जहां देखिये वहीं महाकुंभ की बातें हो रही हैं. जिस तरह से प्रयागराज के संगम में डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी है, उसको देखकर सभी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर महाकुंभ में स्नान करने की मान्यता क्या है, क्यों लोग स्नान करने के लिए इतनी दूर से चलकर संगम में आ रहे हैं. इसके पीछे का धार्मिक महत्व और मान्यता क्या है.

महाकुंभ में स्नान को लेकर बुजुर्गों से  ज्यादा युवाओं में क्रेज

आपको बतायें कि हर 12 साल पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है. इस दौरान श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाते हैं, धार्मिक जानकारों की मानें तो महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप धूल जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. वहीं जिस तरह से महाकुंभ को लेकर लोगों की दीवानगी है उसमें बुजुर्गों से ज्यादा युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है. तो चलिए जान लेते हैं आखिर कुंभ स्नान का क्या महत्व है.

पढ़ें क्या है स्नान का महत्व

आपको बताये कि महाकुंभ में शाही स्नान करने से मन की अशुद्धियां मिट जाती हैं. आपको बताये कि सबसे पहले नागा साधु शाही स्नान करते हैं, इसके बाद ही आम लोगों को स्नान करने की अनुमती होती है. ऐसी मान्यता है कि संगम में शाही स्नान करने से कई गुण ज्यादा फल मिलता है, वहीं जातक को पिछले जन्म में पापों से भी मुक्ति मिलती है,इसके साथ ही पितरों के आत्मा को भी शांति मिलती है.

पढ़ें क्या है महाकुंभ में स्नान ध्यान के पीछे की मान्यता

महाकुंभ हर 12 साल पर लगता है जिसका इंतजार सभी सनातन धर्म के लोग करते हैं, लेकिन महाकुंभ के पीछे एक पौराणिक मान्यता और कथा भी है. जिसके अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था तो अमृत से भरा कुंभ यानि कलश निकला, जिसको लेकर देवताओं असुरो में 12 दिन का भयंकर युद्ध हुआ था, इस दौरान देवताओं की संकेत पर इंद्रदेव के पुत्र जयंत अमृत से भरा कलश लेकर भागने लगे. इस दौरान चार जगहों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में अमृत की बूंदे गिरी, जिसके बाद जिन जिन स्थानों पर कलश से अमृत की बूंदे गिरी थी उन्हीं स्थानों पर कुंभ मेला का आयोजन बारी बारी से हर 12 साल पर किया जाता है.

क्या है शाही स्नान

वैसे तो कुंभ में रोजाना लोग स्नान करते हैं, लेकिन शाही स्नान का अलग महत्व होता है. कुंभ मेले के दौरान कुछ विशेष तिथि होती हैं, जिस दिन शाही स्नान किया जाता है. जिसे धार्मिक रुप से बेहद खास माना जाता है. शाही स्नान पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग अपनी राय कुछ लोग मानते हैं कि नागा साधु की धर्म के प्रतिनिधित्व करते है इसलिए उन्हें सबसे पहले महाकुंभ में शाही स्नान की अनुमती होती है. नागा साधु इस दौरान हाथी घोड़े के साथ रथ पर सवार होकर बड़े धूमधाम से स्नान करने आते है. वहीं आम लोग भी पापों से मुक्ति के लिए शाही स्नान करते है.

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