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नए साल में नक्सल अभियान के दौरान पुलिस जवानों के पास कितनी चुनौती, कैसा रहेगा ऑपरेशन

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 8:21:01 PM

रांची(RANCHI): नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बल के जवानों का अभियान तेज है. 31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे का टारगेट सेट किया गया है. इस टारगेट के तहत अब सुरक्षा बल के जवानों के पास कई चुनौती भी है.सारंडा से बस्तर तक बड़े अभियान की तैयारी है. जिसमें अब टारगेट पर पाँच बड़े नक्सली है. दोनों राज्य में अभी भी नक्सलियों के दस्ते मौजूद है.

सबसे पहले सारंडा की बात कर लेते है.नए साल के मौके पर जहां पूरी दुनियाँ जश्न मना रही है वहीं जबाज जवान नक्सलियों की तलाश में लगे है. अब अभियान और भी तेज कर दिया गया. जिससे तय टारगेट के मुताबिक नक्सलियों का खात्मा किया जा सके. फिलहाल पुलिस मुख्यालय के मुताबिक सारंडा ही एक ऐसा इलाका बचा है जहां माओवादियों का दस्ता मौजूद है. उनके साथ करीब 60-70 लोग मौजूद है. और इन्हे खत्म कर दिया तो झारखंड नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा.

सारंडा में बड़े नक्सली मौजूद है. जिसमें देश के सबसे खतरनाक मिसिर बेसरा है. बेसरा माओवादी संगठन की पोलित ब्योरों सदस्य है. साथ ही सेंट्रल कमिटी के मेम्बर भी. इनके अलावा सारंडा में ही दो अन्य सेंट्रल कमिटी के सदस्य है. सभी कई दशकों से हथियार लेकर घूम रहे है. ऐसे में इन्हे पकड़ने या ढ़ेर करने के लिए सुरक्षा बल के जवानों की एक बड़ी टीम जंगल में लगी है. जिन्हे तलाश कर रही है.

साथ ही बस्तर की बात करें तो यहां भी महज 100 के करीब माओवादी सक्रिय बचे है. जिन्हे भी जंगल में सुरक्षा बल के जवान खोज रहे है. तो वहीं बाहर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने अपील किया है कि हथियार डाल कर मुख्यधारा में लौट जाओ. हिंसा के रास्ते पर अब ज्यादा दिन नहीं रह सकते है.

ऐसे में दोनों राज्य में परिसतिथि एक जैसी है. कभी जंगल में नक्सलियों की जनता अदालत चलती थी अब जवानों का कैम्प है. गाँव की तस्वीर बदलने का दावा सरकार ने किया है. लेकिन इन सब के बीच चुनौतियों की बात कर ले तो इसमें सबसे बड़ी चुनौती की समय बेहद कम है और जवान पर प्रेसर है. अभी भी बड़े नक्सली हथियार लेकर घूम रहे है.खास कर देखा गया है कि अंतिम लड़ाई में भी कई जवानों की शहादत हुई है. सारंडा से लेकर बस्तर तक IED का जाल नक्सलियों ने बिछाया है. जो एक बड़ी चुनौती में से एक है.

लेकिन हर चुनौती को पार करते हुए जवान हर दिन एक नई कामयाबी हाशिल कर रहे है. जवानों की बढ़ती दबिश से कई नक्सली हर दिन हथियार डाल कर मुख्यधारा में लौट रहे है. अब साल 2026 एक नया साल है जहां उम्मीद की किरण दिखी है. जिसमें नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.                                            

Tags:What challenges will the police personnel face during the Naxal operation in the new yearand how will the operation unfold?NAXAL OPERATIONJHARKHAND NEWSRANCHI NEWSJHAKRHAND UPDATESARANDA NEWSJHARKHANDNAXAL UPDATENAXAL TODAY NEWSHIDMABASTAR NEWSBASTAR KA UPDATEBIJAPURNAXALANTI NAXALOPERATION

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