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Varuthini Ekadashi: वरुथिनी एकादशी व्रत को करने से मिलता है एक हजार गौदान का फल, 4 मई को जरुर सुनें ये कथा

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 5:30:11 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हर महीने दो एकादशी पड़ती है, एक शुक्ल पक्ष की और एक कृष्ण पक्ष की. वही एकादशी को सभी व्रत में सर्वोत्तम बताया गया है. इस व्रत का फल सुखदाई होता है. वहीं एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. इस बार वरुथिनी एकादशी 4 में यानी शनिवार के दिन मनाई जाएगी.वरुथिनी एकादशी का व्रत सुख और सौभाग्य के लिए किया जाता है, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.इस एकादशी के व्रत को करने से आपकी अशुभ संस्कारों से भी आपको मुक्ति मिलती है. इस बार वरुथिनी एकादशी 4 में शनिवार को मनाया जायेगा, वहीं इसका पारण 5 मई को होगा.   

वरुथिनी एकादशी के दिन उपवास करना बहुत ही शुभ होता है

  वरुथिनी एकादशी के दिन उपवास करना बहुत ही शुभ माना जाता है लेकिन जो लोग उपवास नहीं कर सकते हैं उन्हें कम से कम इस दिन अन्न नहीं खाना चाहिए. वही भगवान श्री कृष्ण के मधुसूदन स्वरूप की पूजा अर्चना की जानी चाहिए,और फल और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए, वहीं इसके अगले दिन यानी पारण के दिन दानपूर्ण करना काफी अच्छा होता है.  

वरुथिनी एकादशी के दिन जरुर सुनें ये कथा

 वैसे तो सारी एकादशी का अपना महत्व होता है, लेकिन वरुथिनी एकादशी का महत्व कुछ ज्यादा ही है, इस व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता नाम के एक राजा राज किया करते थे, जो बहुत ही दानी  और तपस्वी भी थे. वह भगवान की तपस्या में हमेशा लीन रहते थे. वही एक बार की बात है राजा जंगल में जाकर भगवान की तपस्या कर रहे थे, तभी कहीं से जंगली भालू आया और उनकी उन पर हमला कर दिया. भालू उनके पूरे पैर को खो गया, लेकिन फिर भी राजा ने अपना धैर्य नहीं खोया और अपनी तपस्या में लीन रहे. वहीं पैर चबाने के बाद राजा को भालू घसीटते हुए जंगल में ले गया लेकिन फिर भी राजा घबराएं नहीं और अपने तब में लीन रहे. वहीं मान्धाता राजा मन ही मन भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे और भगवान विष्णु को मन ही मन पुकारने लगे.   राजा मान्धाता की पुकार सुनकर भगवान विष्णु राजा के सामने प्रकट हुए और अपने सुदर्शन चक्र से भालू को मार डाला, लेकिन भालू ने राजा का पूरा पैर ही जख्मी कर दिया था, जिसको देखकर राजा काफी दुखी हुए, उन्हें दुखी देखकर भगवान विष्णु राजा के मन की पूरी बात को समझ गए और भगवान विष्णु ने कहा कि राजा तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा अर्चना करो. राजा ने भगवान विष्णु की की बात सुनकर ऐसा ही किया.भगवान विष्णु ने कहा कि इस भालू ने जो तुम्हारा पैर काटा है, यह तुम्हारे पुराने जन्म का अपराध था, जिसका फल तुम्हें आज भोगना पड़ा भगवान की आज्ञा सुनकर राजा मथुरा की ओर चल दिए. वहां जाकर उन्होंने वरुथिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा पूर्वक किया जिसके बाद इस व्रत के प्रभाव से राजा फिर से सुंदर और संपूर्ण अंग वाला बन गया. 

बीमारी से पीड़ित इंसान को करना चाहिए  व्रत 

आपको बताये कि जो भी व्यक्ति शरीर के किसी पीड़ा से पीड़ित है, तो उसे वरुथिनी एकादशी का व्रत करके भगवान विष्णु से प्रार्थना करनी चाहिए. वहीं इस एकादशी के प्रभाव से राजा को स्वर्ग नसीब हुआ, धार्मिक य है कि जो मनुष्य विधिवत इस एकादशी का व्रत को रखते हैं उनको स्वर्ग लोक मिलता है,इस एकादशी को करने से एक हजार गौदान और गंगा स्नान का फल मिलता है. इसका फल गंगा स्नान के फल से भी बहुत ज्यादा अधिक होता है.इसलिए मनुष्य को इस एकादशी का व्रत जरुर करनी चाहिए. 

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