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 भारत को जी7 समिट में बुलाए जाने पर क्या बोले अमेरिका और यूरोपीय देश, जानिये

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 4:05:51 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप और अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाया और रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म करने पर जोर दिया. मगर, भारत ने रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते जारी रखा. इसे लेकर यूरोप और अमेरिका कई बार भारत के विरुद्ध बयान देते रहे हैं. जिसका भारत ने भी जमकर पलटवार किया है. इसी विवाद को लेकर लग रहा था कि भारत को इस बार के जी7 समिट में आमंत्रित नहीं किया जाएगा. मगर, अंत में भारत को निमंत्रण भेजा गया है.

 

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भारत को आमंत्रित किए जाने पर एनएससी समन्वयक ने ये कहा

इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के समन्वयक जॉन किर्बी ने शुक्रवार को कहा कि भारत को जी7 में आमंत्रित किया गया है क्योंकि एजेंडा गहरा और विविध है और यह रूस से उन्हें अलग करने की कोशिश करने के बारे में नहीं है. किर्बी ने कहा कि यह उन्हें अलग करने या उन्हें किसी अन्य देश के साथ किसी अन्य संघ या साझेदारी से दूर करने की कोशिश करने के बारे में नहीं है. यह यहां लक्ष्य नहीं है. लक्ष्य सामान्य सिद्धांतों और पहलों के एक सेट के आसपास एकजुट करना है.  किर्बी ने कहा कि जी7 जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में आगे बढ़ना चाहता है.

एनएससी समन्वयक ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे विकासशील देशों को जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के एक सवाल का जवाब देते हुए ये टिप्पणी की. इससे पहले, रूस से भारतीय ऊर्जा आयात में बढ़ोतरी की खबरों के बीच, किर्बी ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और अमेरिका भारतीय नेताओं को उनकी आर्थिक नीतियों के बारे में बोलने देता है.

“भारत को अपनी आर्थिक नीति पर बोलने का पूरा हक”

इससे पहले मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में किर्बी ने कहा था कि अमेरिका भारत के साथ इस द्विपक्षीय संबंध को महत्व देता है लेकिन वाशिंगटन चाहता है कि यूक्रेन विवाद के बीच रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बने. जॉन किर्बी ने कहा था कि भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है और ऐसे कई तरीके हैं जिनसे साझेदारी रक्षा और सुरक्षा, आर्थिक रूप से भी दोनों में खुद का प्रतिनिधित्व करती है. मुझे लगता है कि हम भारतीय नेताओं को उनकी आर्थिक नीतियों के बारे में बोलने देंगे. उन्होंने कहा था कि मैं आपको बस इतना बता सकता हूं कि हम भारत के साथ इस द्विपक्षीय संबंध को महत्व देते हैं और हम चाहते हैं कि स्पष्ट रूप से हर देश को अपने लिए ये निर्णय लेने होंगे. ये संप्रभु निर्णय हैं लेकिन हम रूस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितना संभव हो उतना दबाव बनाना चाहते हैं.

भारत ने की है रूस से ऊर्जा आयात में वृद्धि

भारत ने हाल के सप्ताहों में मास्को पर वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद रूस से ऊर्जा आयात में वृद्धि की है. अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को संदेश दिया कि रूस से ऊर्जा आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वे तेजी से वृद्धि नहीं देखना चाहते हैं. भारत-रूस के बीच आर्थिक सहयोग के विकास के लिए कई संस्थागत तंत्र स्थापित किए गए हैं. लेकिन यूक्रेन युद्ध और उसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध व्यापार में बाधा साबित हुए हैं.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस महीने की शुरुआत में यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से भारतीय तेल खरीद की अनुचित आलोचना पर पलटवार किया था, जिसने विश्व अर्थव्यवस्था पर असर डाला है. रूस से भारत के तेल आयात का बचाव करते हुए, जयशंकर ने जोर देकर कहा था कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूक्रेन संघर्ष विकासशील देशों को कैसे प्रभावित कर रहा है. उन्होंने यह भी सवाल किया था कि केवल भारत से सवाल क्यों किया जा रहा है जबकि यूरोप ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से गैस आयात करना जारी रखा है. इस सवाल के जवाब में कि क्या रूस से भारत का तेल आयात चल रहे यूक्रेन युद्ध के लिए फन्डिंग नहीं कर रहा है, जयशंकर ने कहा था कि अगर भारत रूस के तेल खरीद कर युद्ध को फंडिंग कर रहा है, तो मुझे बताएं कि रूसी गैस खरीदना युद्ध को फंडिंग नहीं कर रहा है? जयशंकर ने कहा था कि यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के पैकेज कुछ यूरोपीय देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगाए गए हैं. यदि आप आप अपने प्रति विचारशील हो सकते हैं, तो आप अन्य लोगों के प्रति भी विचारशील हो सकते हैं.

 

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