जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): मार्च–अप्रैल माह में हुई बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महुआ उत्पादन को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. प्रतिकूल मौसम के कारण महुआ के फूल समय से पहले झड़ गए. इससे पूर्वी सिंहभूम जिला और दलमा में महुआ के उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत गिरावट आई है. इसका सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ा है, जो हर साल जंगलों से महुआ चुन कर अपनी आय का बड़ा हिस्सा जुटाते हैं.
खासकर आदिवासी महिलाएं, जो सुबह-सुबह जंगलों में महुआ चुनने जाती हैं, इस बार पर्याप्त फूल नहीं मिलने से मायूस हैं. उत्पादन घटने के कारण बाजार में महुआ की उपलब्धता भी कम हो गई है. नतीजतन, महुआ पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने मौसमी रोजगार और आमदनी का संकट गहरा गया है. पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांधा, मुसाबनी, घाटशिला, चाकुलिया और मानगो के ग्रामीण इलाकों में महुआ बहुतायत मात्रा में जंगल में मिलती है. ग्रामीण इसे पिला सोना भी कहते है. लेकिन इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे- छोटे ओले गिरने, बारिश और आंधी से ये पिला सोना ग्रामीणों को प्रयाप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है.
धूप की कमी से प्रक्रिया किया प्रभावित
मार्च–अप्रैल महुआ फूल झड़ने का प्रमुख समय होता है. बढ़ती गर्मी इसके लिए अनुकूल माहौल बनाती है. इसी दौरान ग्रामीण जंगलों में महुआ चुनकर उसे सुखाकर बेचते है. सूखे महुआ फूल 30 से 40 रुपए प्रति किलो बाजारों में बेचते है. महुआ ग्रामीणों के लिए अहम आय का स्रोत होता है. लेकिन इस वर्ष बेमौसम बारिश और धूप की कमी ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है. फूल कम झड़े और जो गिरे भी, वे नमी के कारण खराब हो गए, जिससे उन्हें सुखाना मुश्किल हो गया. इसके साथ ही महुआ के फल और बीज का उत्पादन भी प्रभावित होगा, जिससे आगे होने वाली आमदनी पर भी असर पड़ेगा. इस तरह ग्रामीणों को इस बार दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है. ग्रामीण बसंती मुर्मू ने बताया कि इस साल जंगलों में महुआ पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है. बारिश ने महुआ उत्पादन प्रभावित किया है. इसके कारण आमदनी भी कम होगी. जंगल में महुआ चुन तो रहे हैं, लेकिन काफी कम महुआ मिल रहा है.
जिले में करीब 15 करोड़ का होता है कारोबार
पूर्वी सिंहभूम जिले में महुआ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. हर साल महुआ से करीब 15 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. यह कई हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है. ग्रामीण इसे जंगलों से चुन और सुझाकर स्थानीय व्यापारियों को बेचते है. महुआ का उपयोग खाद्य पदार्थों, पेय और अन्य उत्पादों में किया जाता है. इस पारंपरिक गतिविधि से न केवल लोगों को रोजगार मिलता है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है. लेकिन बारिश के कारण इस साल 10 करोड़ रुपए का कारोबार होने की संभावना है.
बारिश से उपादान हुआ है पर प्रभावित
दलमा के वनपाल राजा घोष के अनुसार इस वर्ष असमय हुई बारिश ने महुआ उत्पादन पर असर डाला है. आमतौर पर गर्म और शुष्क मौसम में महुआ के फूल अच्छी मात्रा में झड़ते हैं, लेकिन इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव ने इसकी प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया. जंगलों में पेड़ों के नीचे पहले की तुलना में काफी कम महुआ दिखाई दे रहे हैं. महुआ पर निर्भर परिवारों की आय पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.
रिपोर्ट:रोहित सिंह