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माता का ऐसा अद्भुत मंदिर जहां प्रसाद की जगह स्याही का लगता है भोग, पढ़ें इसका 400 साल पुराना इतिहास

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 14, 2026, 4:59:55 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हमारे देश में देवी देवताओं के लाखों मंदिर है जिनका अलग-अलग इतिहास और मान्यताएं है.वही बात अगर मां दुर्गा की की हो तो माता का मंदिर हर राज्य जिला और गांव में आपको देखने को मिल जाएगा, लेकिन आज हम मां के सरस्वती स्वरूप के ऐसे मंदिर की बात करने वाले है जहां लोग प्रसाद की जगह स्याही चढ़ाते है.यह मंदिर देश के किस राज्य में स्थापित है और कितना साल पुराना है इसका इतिहास क्या है आज हम आपको पूरी जानकारी देंगे.

400 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

आपको बताये कि ये चमत्कारिक मंदिर बाबा महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में स्थित है, जो 400 साल पुराना है. मुगलकालीन इस माता के मंदिर में बसंत पंचमी पर विद्यार्थी विद्या की देवी का स्याही से अभिषेक करते हैं, और विद्या का वर मांगते है.इस मंदिर में मां सरस्वती की काले पाषाण की बेसकिमती मूर्ती विराजमान है.

माता अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं

 यहां की ऐसी मान्यता है कि माता अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.जहां सरस्वती पूजा के दिन यहां खास पूजा की जाती है, जिसको लेकर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मंदिर को सरसों के फूल से सजाया जाता है, जिसका नजारा अद्भुत होता है.आपको बताये कि इस मंदिर में बसंत पंचमी के दिन छात्र-छात्रा मां शारदे की स्याही और कलम चढ़ाकर पूजा अर्चना करते है,और बेहतर शिक्षा दीक्षा का वर मांगते है.जब बच्चों की परीक्षा होती है तो उस समय भी यहां आकर स्याही और कलम चढ़ाते हैं, उनको मान्यता की ऐसा करने से विद्या की देवी का आशीर्वाद मिलता है.

पढ़ें कहां मौजूद है ये मंदिर

ये मंदिर उज्जैन के सिहंपुरी के सकरे मार्ग में स्थित है.भले ही ये मंदिर काफी छोटा है, लेकिन मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है.यहां के पुजारी अनिल मोदी बताते है कि छात्र यहां बसंत पंचमी के साथ परीक्षाओं के दौरान भी कलम और स्याही चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं.

Tags:Chatra navtra

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