TNP DESK: आज के जमाने में शहर की सड़कों पर चल रही हर दूसरी गाड़ी के पीछे एक कहानी छिपी हैं आप सोच रहे होंगे की किस तरह की कहानी छिपी होंगी ,वो कहानी हैं कैब ड्राइवर की. Uber और Ola जैसे प्लेटफॉर्म्स ने लाखों लोगों को रोजगार दिया है. कुछ लोगों का कहना हैं की ये आजादी हैं तो कुछ लोगों का कहना हैं की ये मजबूरी हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही हैं की क्या ये सुरक्षित हैं?
पहली नजर में कैब ड्राइविंग एक आसान और आकर्षक विकल्प लगता हैं जिसमे कोई बॉस नहीं , अपने मर्जी का काम करते रहो पूरे आजादी के साथ, जितना चलाओ उतना कमाओ. यही वजह थी की इस सेक्टर में तेजी से लोग जुडते गए. लेकिन जैसे – जैसे समय गुज़रता रहा , इस काम की सच्चाई बाहर आने लगी.
पहले जहां ड्राइवर्स को अच्छा इंसेंटिव मिलता था, वही अब ये होता हैं की राइड्स की संख्या बढ़ने के बावजूद कमाई उतनी स्थिर नहीं रहती. अगर उन्हे एक दिन अच्छे राइड्स मिले तो कमाई याची हो जाती हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर अगर उन्हे कोई राइड नहीं मिला तो उनकी कमाई ठप हो जाती हैं. ऊपर से ईंधन के बढ़ते दाम और गाड़ी का मेंटेनेंस खर्च, इन सबके बाद बचत काफी कम रह जाती है.
और सबसे बड़ी बात ये हैं की कैब ड्राइवर्स किसी कंपनी के कर्मचारी नहीं होते। इसका मतलब हैं की इसकी कोई स्टेबिलिटी नहीं हैं. अगर उनका अकाउंट किसी कारणवर्ष बंद हो जाए तो उनकी कमाई तुरंत रोक दी जाती हैं . उनके जॉब मे न कोई फिक्स कॉन्ट्रैक्ट होता हैं और नाही कोई गारंटी होती हैं.
आपको बात दे की किसे कितना राइड मिलेगा साथ ही साथ कौनसे एरिया में मिलेगा ये सब ऐप बताता हैं. कई बार ऐसा होता हैं की ड्राइवर्स को समझ नहीं आता की उन्हे कम राइड्स क मिल रही हैं या उनका इंसेंटिव क्यूँ घट गया. इसका निष्कर्ष यही हैं की उनका खुद के ही काम पे कोई कंट्रोल नहीं हैं.
अधिक कमाई के लिए लिए ड्राइवर्स को लंबी-लंबी शिफ्ट करनी पड़ती है, काम से कम 10 से 12 घंटे तक की शिफ्ट होती हैं उनकी. प्रदूषण, मौसम ,ट्रैफिक और सड़क की हालत ये सब को नजरंदाज करते हुए उन्हे ड्राइव करना पड़ता हैं इससे शारीरिक एवं मानसिक तनाव भी बढ़ता हैं.
हालांकि, इस काम के कुछ अच्छे पहलू भी हैं. जो लोग जल्दी कमाई शुरू करना चाहते हैं या जो लोग को पार्ट टाइम जॉब करना हो तो ये विकल्प उनके लिए सही हैं लेकिन ध्यान रहे इसपे ही पूरी तरह आधारित रहना सही नहीं हैं क्यूंकी इसमे स्थिरता नहीं हैं.