टीएनपी डेस्क (TNP DESK): कभी हाशिए पर रहने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अब इतिहास रच दिया है. कल घोषित हुए विधानसभा चुनाव परिणामों में भाजपा ने 200 से अधिक सीटें जीतकर राज्य की सत्ता पर कब्जा जमा लिया है. यह जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, रणनीति और संगठन विस्तार की कहानी है.
अगर पिछले दो दशकों पर नजर डालें, तो भाजपा का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. 2001 और 2006 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी. यहां तक कि 2011 में जब ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वामपंथी शासन को समाप्त कर सत्ता संभाली, तब भी भाजपा अपना खाता नहीं खोल सकी थी. उस दौर में राज्य की राजनीति पूरी तरह क्षेत्रीय दलों और वामपंथ के इर्द-गिर्द सिमटी हुई थी.
भाजपा के लिए असली बदलाव 2014 के लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ. इस चुनाव में पार्टी ने पहली बार प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए करीब 17 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया और 2 सीटों पर जीत दर्ज की. यहीं से बंगाल में भाजपा के विस्तार की नींव पड़ी. इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 3 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. भले ही संख्या कम थी, लेकिन वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी ने साफ कर दिया कि पार्टी धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए. इस प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति में भाजपा को एक मजबूत चुनौती के रूप में स्थापित कर दिया.
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया. पार्टी का वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 38 प्रतिशत तक पहुंच गया. यह संकेत था कि बंगाल की राजनीति अब दो ध्रुवों में बंट चुकी है और मुकाबला सीधा हो गया है. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को कुछ नुकसान उठाना पड़ा और वह 12 सीटों पर सिमट गई, लेकिन संगठन ने हार नहीं मानी. नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने लगातार राज्य में सक्रिय रहकर कार्यकर्ताओं को मजबूत किया और रणनीति को धार दी.
इन सभी प्रयासों का परिणाम अब 2026 के विधानसभा चुनाव में सामने आया है, जहां भाजपा ने 200 से अधिक सीटें जीतकर ऐतिहासिक विजय हासिल की है. यह जीत बताती है कि कैसे एक पार्टी ने शून्य से शुरुआत कर धीरे-धीरे जनता का विश्वास जीतते हुए सत्ता तक का सफर तय किया. पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बदलाव एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है. दशकों से चले आ रहे राजनीतिक समीकरण अब बदल चुके हैं और राज्य की सत्ता में एक नई ताकत का उदय हुआ है.