पलामू (PALAMU): जिले का हुसैनाबाद थाना पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में बना है. कभी दरोगा चाय दुकानदार से पाँच हजार रुपये मांगते है तो कभी इस थाने के प्रभारी ऑन ड्यूटी रील बनाते है. अब हद तो तब तो गई जब थाना प्रभारी पर फिर दुकानदार का ने दुकान में आग लगाने की धमकी और मारपीट का आरोप लगाया है. अब इस आरोप के बाद सवाल उठने लगा की आखिर पुलिस अपने मूल कामों को छोड़ कर कैसे दूसरे काम में ज्यादा एक्टिव हो गई है.
पीड़ित दुकानदार
अब नया मामला राम बिगहा गांव से सामने आया है. यहां गाँव में मुन्ना पाल अपनी दवा दुकान चलाते है. कई सालों से किराए के मकान में अपने कारोबार का संचालन कर रहे है. लेकिन इस बीच 19 अप्रैल को इनके साथ कुछ ऐसा हुआ की कभी सोचा भी नहीं था. राम बिगहा गाँव में थाना की गाड़ी पहुँचती है. इसमें बैठे एक पुलिस अधिकारी गाड़ी से उतरते है और बोलते है बड़ा बाबू बुलाए है. थाना जा कर मिल लो.
दुकानदार भी थाना पहुंच गया. लेकिन आरोप लगा की यहां उसके साथ गाली गलौज की गई. पीड़ित के अनुसार, थाना पहुंचते ही थाना प्रभारी चंदन कुमार ने बिना किसी स्पष्ट कारण के उनके साथ अभद्र व्यवहार किया. आरोप है कि थाना प्रभारी ने गाली-गलौज करते हुए उनके कॉलर पकड़ लिए और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कथित तौर पर कहा, “उजला-उजला पैंट-शर्ट पहनते हो, नेता बनते हो क्या?” इतना ही नहीं, मेडिकल दुकान में आग लगा देने की धमकी भी दी गई.
मुन्ना पाल का कहना है कि जब उन्होंने अपने दोष के बारे में पूछा, तो उन्हें चुप रहने और बाहर बैठने को कहा गया, अन्यथा हाजत में बंद करने की धमकी दी गई. पीड़ित ने बताया कि उन्हें दुकान खाली करने को लेकर मकान मालिक की ओर से कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई है. उनका आरोप है कि थाना प्रभारी मकान मालिक के साथ मिलकर जबरन दुकान खाली कराने का दबाव बना रहे हैं.
पीड़ित ने यह भी कहा कि यदि दुकान खाली कराने की कोई वैधानिक प्रक्रिया है, तो इसमें थाना प्रभारी को सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय मकान मालिक से बात करनी चाहिए थी. लेकिन इसके विपरीत उन्हें बुलाकर अपमानित किया गया और मारपीट का प्रयास किया गया.इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित ने झारखंड सरकार के पुलिस महानिदेशक से निष्पक्ष जांच कर दोषी थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि वे एक गरीब परिवार से आते हैं और इसी दुकान से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. यदि इस तरह का उत्पीड़न जारी रहा, तो उनका जीवन यापन मुश्किल हो जाएगा.अब देखना होगा कि इस शिकायत पर विभाग क्या कदम उठाता है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं.