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सदर अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड बना झाड़-फूंक का अड्डा, 45 मिनट तक चलता रहा अंधविश्वास का खेल

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 2:52:35 PM

समस्तीपुर(SAMASTIPUR):सरकार सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के दावे करती रहती है, वहीं दूसरी ओर समस्तीपुर सदर अस्पताल से सामने आई तस्वीर इन दावों को कटघरे में खड़ा कर रही है. इमरजेंसी वार्ड के अंदर जो कुछ हुआ, वह किसी को भी हैरान कर सकता है.

इमरजेंसी वार्ड में ‘भगत’ की एंट्री और झाड़-फूंक की शुरुआत

समस्तीपुर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक व्यक्ति हाथों में माला, माथे पर लाल टीका और लाल गमछा लिए प्रवेश करता है. यह कोई तीमारदार नहीं, बल्कि खुद को झाड़-फूंक करने वाला “भगत” बताने वाला आलोक कुमार है, जो केशोपट्टी गांव का निवासी है.बीमार महिला फूलो देवी, निवासी चक दौलत, कल्याणपुरके पास पहुंचता है. पहले वह मालाकर जाप करता है, फिर झाड़ू लेकर महिला पर झाड़-फूंक शुरू कर देता है. अस्पताल की बेड पर लेटी यह महिला पेट की बीमारी और दर्द से परेशान थी, जिसके इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल लाया गया था

45 मिनट तक चलता रहा अंधविश्वास का तमाशा

डॉक्टरों ने महिला का प्राथमिक इलाज शुरू तो कर दिया था, लेकिन इसी बीच किसी के कहने पर बुलाए गए भगत आलोक ने पूरे इमरजेंसी वार्ड को अंधविश्वास का केंद्र बना दिया.करीब 45 मिनट तक भगत ने झाड़ू चलाया, मंत्र पढ़े और ‘भूत भगाने’ का दावा करता रहा.सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतने संवेदनशील हिस्से में इस पूरे तमाशे को रोकने या टोकने के लिए कोई स्वास्थ्यकर्मी, गार्ड या अधिकारी आगे नहीं आया. इमरजेंसी वार्ड में मौजूद लोग बस तमाशबीन बने रहे.

परिजनों ने क्या कहा?

बीमार महिला के परिजनों ने बताया कि डॉक्टर इलाज कर रहे थे, लेकिन दर्द कम नहीं हो रहा था.किसी ने कहा कि भगत को बुलवाओ, इसलिए उसे बुलाया गया.जब भगत आलोक कुमार से पूछा गया तो उसने कहाvमैं तंत्र-मंत्र जानता हूँ. लोग बुलाते हैं तो मैं उनके भले के लिए झाड़-फूंक करता हूँ.इमरजेंसी वार्ड में उसकी निर्बाध एंट्री और लंबे समय तक चलती झाड़-फूंक अस्पताल की सुरक्षा, प्रबंधन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

प्रशासन पर उठे सवाल

एक सरकारी अस्पताल, वह भी इमरजेंसी वार्ड जहां सेकंड की कीमत होती है.वहाँ अंधविश्वास के लिए इस तरह का वातावरण मिलना न केवल लापरवाही है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को साफ दर्शाता है.अब स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर यह सवाल और गहरा हो गया है कि इमरजेंसी वार्ड में झाड़-फूंक जैसी गतिविधि आखिर कैसे चली और किसकी जिम्मेदारी तय होगी?

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