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ऐसा परम भक्त जिसके लिए भगवान विष्णु को लेना पड़ा उग्र नरसिम्हा अवतार, पढ़िए होली पर खास प्रह्लाद की कहानी

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 3, 2026, 1:55:59 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):होली से एक दिन पहले होलिका दहन की जाती है जिसके पीछे की पौराणिक कथा और परंपरा के बारे में हम सभी ने सुना है जहां कहा जाता है भगवान विष्णु के परम भक्त माने जाने वाले बालक प्रह्लाद की भक्ति करने से परेशान उसके शक्तिशाली राक्षस पिता हिरणकश्यप ने उन्हें मारने की काफी ज्यादा कोशिश की लेकिन उन्हें भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी.कभी ऊंची चट्टानों से फेंकवाया, कभी हाथियों से रोंदा तो कभी सांपों के बीच छोड़ दिया गया, यहां तक कि उन्हें जहर तक दिया गया लेकिन भगवान विष्णु की भक्ति के आगे सब असफल हो गया और भक्त प्रह्लाद सही सलामत बच गए. जब इन सब से भी पेट नहीं भरा तो राक्षस हिरणकश्यप ने अपने ही पुत्र को मरवाने के लिए अपनी बहन होलिका की मदद मांगी जिसका विशेष वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी क्योंकि उसके पास एक शक्तिशाली साल था.

 

 

 

 

 

 

 

पढ़े क्या है होली से जुडी भक्त प्रह्लाद की कहानी

दरअसल हिरण कश्यप की बहन होलिका के पास एक ऐसा चादर था जिसे ओढ़ लेने के बाद आप आग पर बैठ जाएं तब भी आप नहीं जल सकते है दोनों भाई बहन ने मिलकर भक्त प्रह्लाद को आग में जलाने की योजना बनाई.होलिका छोटे भक्त प्रह्लाद को लेकर जलती हुई धधकती आग पर बैठ गई खुद तो साल ओढ़ लिया जिससे वह नहीं जल पाती लेकिन भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ गई.जैसी ही वह आग पर लेकर भक्त प्रल्हाद को बैठाया भगवान विष्णु ने होलिका को ही जला कर भस्म कर दिया और भक्त प्रहलाद जिंदा बच गए.

भक्त प्रह्लाद के लिए भगवान विष्णु ने लिया नरसिम्हा अवतार

होलिका और भक्त प्रह्लाद से जुड़ी कहानी हम सभी ने सुनी है लेकिन आज हम आपको प्रह्लाद और भगवान विष्णु के बारे में बताते है जहां एक भक्त के लिए भगवान विष्णु को उग्र नरसिम्हा अवतार लेना पडा.पौराणिक कथा की माने तो बालक प्रह्लाद का जन्म शक्तिशाली राक्षस राजा हिरणकश्यप के घर में हुआ था जो असुरों पर राज करता था और खुद को ब्रह्माण्ड का शासक मानता था, वह चाहता था की लोग उसकी पूजा करें हालांकी वह भगवान विष्णु से काफी ज्यादा घीन करता था क्योंकि भगवान विष्णु ने उसके भाई हिरण्याक्ष की हत्या कर दी थी.लेकिन कुछ ही दिन बाद उसके घर में एक ऐसे बालक का जन्म हुआ जिसने असुरों के कुल के विरोध में जाकर भगवान विष्णु की भक्ति बचपन से ही शुरू कर दी.जब हिरणकश्यप को इस बात की जानकारी हुई तो उसने अपने पुत्र से भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए कहा, लेकिन भक्त प्रह्लाद कहा मानने वाले थे.लाख कोशिशों के बावजूद जब वह नहीं माने तो हिरणकश्यप ने अपने ही पुत्र को मरवाने के लिए कई साजिश रची.

पढ़े कौन था राक्षस हिरणकश्यप

ऐसे में आपको सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर हिरणकश्यप था कौन तो आपको बता दें हिरणकश्यप अपनी अमरता की कामना के लिए तपस्या की उसकी भक्ति अनुशासन से प्रशन्न होकर भगवान ब्रह्मा उसके सामने प्रकट हुए उसने अमरता की कामना की लेकिन ब्रह्मा जी ने समझाया कि इस धरती पर कोई भी अमर नहीं है यानि जो आया है उसे एक दिन मरना होगा.तभी हिरन कश्यप ने अपनी रणनीति के तहत एक शर्त रखी और भगवान ब्रह्मा से निवेदन किया कि उसकी मृत्यु न तो मनुष्य के हाथों हो, न पशु के हाथों, न भवन के अंदर और न बाहर, न दिन में और न रात में, न भूमि पर, न आकाश में और न जल में, और न ही किसी शस्त्र से.भगवान ब्रह्मा ने ये वरदान दे दिया.

लाखों से बचे प्रह्लाद ने नहीं छोड़ी विष्णु की भक्ति

 इस वरदान को प्राप्त करने के बाद हिरणकश्यप काफी ज्यादा तानाशाह हो गया, उसने ब्रह्माण्ड का राजा खुद को घोषित कर दिया और मौत के खौफ से बेखौफ हो गया. बालक प्रह्लाद की भगवान विष्णु की भक्ति को देखते हुए हिरणकश्यप ने उन्हें राजनीति और युद्ध सीखने के लिए गुरुकुल भेज दिया.हालांकी वहां जाने के बाद भी भक्त प्रह्लाद पर भगवान विष्णु की भक्ति कम नहीं हुई वही जब हिरणकश्यप घर वापस आए तो उन्हें उनके पिता ने पूछा कि उसने विद्यालय में क्या सिखाया तो प्रह्लाद ने जवाब दिया कि जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान भगवान विष्णु की भक्ति है जो सभी के हृदय में निवास करती है.भक्त प्रह्लाद की इस वचन को सुनकर हिरणकश्यप काफी क्रोधित हो गया और प्रह्लाद की जान लेने के लिए सैनिको को आदेश दिया लाख कोशिशों के बवजूद भक्त प्रह्लाद बच गए.

इस प्रकार भगवान विष्णु ने ब्रह्मा के वरदान को पूरा किया

जब हिरणकश्यप की सारी कोशिश नाकाम हो गई तो उसने भक्त प्रह्लाद से पूछा कि तुम कहते हो कि तुम्हारे विष्णु हर जगह है तो क्या इस खंभे में भी विद्यमान है, तब भक्त प्रह्लाद ने पूरी भक्ति और विश्वास के साथ कहा कि इस खम्बे में भी मेरे भगवान विष्णु मौजूद है. क्रोधित होकर राजा ने अपने शस्त्र से प्रह्लाद पर हमला किया उसी वक्त भगवान विष्णु नरसिम्हा के रूप में खम्बे से अवतार के लिए यह भगवान विष्णु का नरसिम्हा अवतार आधा मनुष्य और आधा शेर का शक्तिशाली रूप था.नरसिम्हा गुडालु बेला में प्रकट हुए जो ना तो दिन था और ना ही रात,वो हिरण कश्यप को महल के द्वार तक घसीटकर ले गये जो ना अंदर था और ना ही बाहर,नरसिम्हा ने राजा को अपने गोद में बिठाया जो ना धरती थी और न ही आकाश और हथियार के बजाय अपने पंजों से उसका वध कर दिया इस प्रकार ब्रह्मा के वरदान के सभी स्रोत पूरी हुई और न्याय भी प्राप्त हुआ.

जब भगवान विष्णु का क्रोध शांत नहीं कर पाये देवी-देवता ...

हिरणकश्यप का वध करने के बाद नरसिम्हा काफी क्रोधित हो गए जिससे पूरा ब्रह्माण्ड हिल गया. कोई भी देवी देवता भगवान विष्णु के क्रोध को शांत नहीं कर पा रहा था तभी अंत में भक्त प्रह्लाद ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की भगवान विष्णु शांत हुए और पूरी सृष्टि अपने नियमानुसर चलने लगी.

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