धनबाद (DHANBAD): धनबाद में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां पिता की मौत के 2 साल बाद बेटे का जन्म हुआ है. यह हम नहीं कह रहे हैं, नगर निगम में जमा किए गए रिकॉर्ड्स बता रहे हैं. यह अलग बात है कि नगर निगम ने इस आवेदन को खारिज कर दिया है. लेकिन मामला लोगों की जुबान पर चढ़ गया है. दरअसल, स्कूल में एडमिशन के लिए उम्र घटाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं. धनबाद नगर निगम में एक ऐसा ही अजीबोगरीब मामला सामने आया तो अधिकारी भी हैरत में पड़ गए.
पिता की मौत के दो साल बाद बताया गया जन्म
पिता की मृत्यु के 2 साल बाद बेटे का जन्म बताकर नगर निगम में जन्म प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन दिया गया था. सूचना के मुताबिक हीरापुर की रहने वाली एक महिला ने नगर निगम में अपने बेटे का जन्म प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन दिया था. आवेदन में बच्चे का जन्म घर में बताया गया था और इसके अनुसार एफिडेविट भी जमा किया गया था. पिता को दिवंगत बताया गया. नगर निगम में जब पिता की मृत्यु का सर्टिफिकेट मांगा तो महिला ने इसकी कॉपी जमा करा दी. मृत्यु प्रमाण पत्र धनबाद नगर निगम की ओर से ही जारी किया गया था.
बच्चे के पिता की मृत्यु 2013 में हो गई थी
बच्चे के पिता की मृत्यु 2013 में हो गई थी. जबकि महिला ने बच्चे का जन्म 2015 में बताया. पिता की मृत्यु के 2 साल बाद बच्चों के बर्थ सर्टिफिकेट में खेल अब पकड़ में आ गया है. दरअसल, बच्चों के स्कूल में नामांकन के लिए कुछ अभिभावक ऐसा करते हैं. घर में जन्म बताकर शपथ पत्र तक दे देते हैं. वैसे, नर्सिंग होम में पैदा होने वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था है कि नर्सिंग होम वाले बच्चे के जन्म होने के साथ ही इसकी सूचना नगर निगम के पोर्टल में भेज देते हैं. फिर पोर्टल में आई जानकारी के आधार पर नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है. लेकिन घर में जन्म होने के मामले में अभिभावक के शपथ पत्र को ही मानकर जन्म प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाता है.