टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज के जमाने में Meesho एक ऐसा नाम और ब्रांड बन चुका है, जहां लोग बेहद कम कीमत में कपड़े, जूते, एक्सेसरीज़ और घरेलू सामान खरीदते हैं. कई बार ऐसा होता हैं की कोई महंगी समान बहुत ही कम दाम में हमे Meesho पे मिल जाती है. जब कुछ ऐसा होता है तो ये सवाल जरूर उठता है हमारे मन में की आखिर इतना सस्ता कैसे? क्या इसमें कोई छुपा हुआ खेल है या यह सिर्फ एक अलग बिजनेस मॉडल का हिस्सा है?
सबसे पहले समझना जरूरी है कि Meesho एक पारंपरिक ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. यहां ज्यादातर प्रोडक्ट सीधे छोटे विक्रेताओं और मैन्युफैक्चरर्स से आते हैं. यानी बीच में बड़े-बड़े ब्रांड या महंगे स्टोर नहीं होते, जिससे उस समान के दाम अपने आप कम हो जाती है.
इसकी दूसरी सबसे बड़ी वजह है इस प्रक्रिया के बीच में कोई नहीं आता. जहां दूसरी कंपनियां वेयरहाउस, ब्रांडिंग और बड़े स्तर पर मार्केटिंग पर भारी खर्च करती हैं, वहीं Meesho इन खर्चों को काफी हद तक कम रखता है. इससे प्रोडक्ट की कीमत भी कम हो जाती है.
इसका तीसरा कारण है रीसेलिंग.Meesho ने हजारों लोगों को जोड़ रखा है, जो उसके प्रोडक्ट्स को आगे बेचते हैं. इससे कंपनी को अलग से बड़े विज्ञापन पर उतना खर्च नहीं करना पड़ता. यह नेटवर्क खुद ही सामान को लोगों तक पहुंचाता है.
अब बात आती है गुणवत्ता की. कम कीमत का मतलब हमेशा खराब क्वालिटी नहीं होता, लेकिन यह भी सच है कि Meesho पर मिलने वाले प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती. क्योंकि यहां कई अलग-अलग विक्रेता होते हैं, इसलिए कुछ प्रोडक्ट अच्छे होते हैं, तो कुछ औसत या कम गुणवत्ता के भी मिल सकते हैं.
यानी यहां खरीदारी करते समय थोड़ा समझदारी जरूरी है जैसे कि रेटिंग देखना, रिव्यू पढ़ना और प्रोडक्ट की जानकारी ध्यान से समझना.
मात्रा के मामले में भी यही बात लागू होती है.कई बार फोटो में प्रोडक्ट बड़ा या ज्यादा दिखता है, लेकिन असल में वह छोटा निकल सकता है. इसलिए केवल तस्वीर देखकर फैसला करना सही नहीं होता.
Meesho का सस्ता होना एक तरह से उसकी रणनीति है. कम कीमत देकर ज्यादा ग्राहकों को जोड़ना. यही वजह है कि यह प्लेटफॉर्म खासकर छोटे शहरों और मिडिल क्लास के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है.
लेकिन यहां एक संतुलन समझना जरूरी है,कम कीमत के साथ थोड़ा जोखिम भी जुड़ा होता है. हर बार प्रोडक्ट वैसा ही निकले, यह जरूरी नहीं.