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Late Night सोने की हैबिट से बढ़ सकता है हृदय रोग का खतरा, Study में बड़ा खुलासा

Late Night सोने की हैबिट से बढ़ सकता है हृदय रोग का खतरा, Study में बड़ा खुलासा

TNP DESK-आज के डिजिटल लाइफस्टाइल में देर रात तक जागना आम बात हो गई है. ओटीटी बिंज-वॉचिंग, सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग, लेट-नाइट वर्क शिफ्ट या एग्ज़ाम प्रेप बस 10 मिनट और कहते-कहते कब रात के 1–2 बज जाते हैं पता ही नहीं चलता. लेकिन क्या यह आदत आपके दिल की सेहत पर असर डाल रही है? आइए जानते हैं ....

क्या कहती है रिसर्च?

हालिया स्टडीज़ के मुताबिक जिन लोगों की स्लीप साइकल अनियमित होती है या जो नियमित रूप से आधी रात के बाद सोते हैं उनमें कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ का खतरा लगभग 16% तक बढ़ सकता है.  यह सिर्फ थकान, सुस्ती या डार्क सर्कल्स की बात नहीं है यह एक लॉन्ग-टर्म हेल्थ रिस्क है.

असली समस्या सिर्फ देर से सोना नहीं

सिर्फ लेट सोना ही मुख्य कारण नहीं है. असली समस्या उस लाइफस्टाइल पैटर्न से जुड़ी है.जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते तो आपकी बॉडी की बायोलॉजिकल क्लॉक जिसे सर्केडियन रिद्म कहा जाता है डिस्टर्ब हो जाती है. यही सिस्टम आपके हार्मोन, ब्लड प्रेशर, मेटाबॉलिज़्म और एनर्जी लेवल को रेगुलेट करता है.

स्लीप की कमी से हार्मोनल इम्बैलेंस हो सकता है, ब्लड प्रेशर स्पाइक कर सकता है, और बॉडी में इन्फ्लेमेशन बढ़ सकती है. अगर ये पैटर्न लंबे समय तक चलता रहा, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है.

स्टडीज़ में ये भी ऑब्ज़र्व किया गया कि महिलाओं में अनियमित नींद का इम्पैक्ट थोड़ा ज्यादा देखा गया, हालांकि पुरुष भी सेफ ज़ोन में नहीं हैं.

तो फिर सॉल्यूशन क्या है?

सबसे पहले फिक्स योर स्लीप शेड्यूल. कोशिश करें कि आप रोज लगभग एक ही टाइम पर सोएं और उठें. वीकेंड पर भी “स्लीप मैराथन” से बचें, क्योंकि इससे बॉडी क्लॉक और गड़बड़ा जाती है.

दूसरा डिजिटल डिटॉक्स अपनाइए. सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बनाइए. स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आपके मेलाटोनिन लेवल को सप्रेस कर देती है, जिससे स्लीप ऑनसेट डिले होता है.

तीसरा — लाइफस्टाइल अपग्रेड कीजिए. बैलेंस्ड डाइट, कम प्रोसेस्ड फूड, लिमिटेड कैफीन और नो स्मोकिंग ये सिर्फ एडवाइस नहीं, बल्कि हार्ट प्रोटेक्शन स्ट्रैटेजी है.

रेगुलर वर्कआउट भी गेम-चेंजर है. रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी  चाहे ब्रिस्क वॉक, योगा, जिम या साइक्लिंग  आपकी कार्डियो फिटनेस को बूस्ट करती है.

स्ट्रेस मैनेजमेंट भी उतना ही जरूरी है. लेट-नाइट वर्क और मेंटल प्रेशर स्लीप क्वालिटी को डैमेज कर देते हैं. मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग, लाइट स्ट्रेचिंग या माइंडफुलनेस टेक्नीक ये छोटे स्टेप्स बड़े रिज़ल्ट दे सकते हैं.

याद रखिए, आपका दिल 24×7 ऑन-ड्यूटी रहता है. उसे भी रिकवरी टाइम चाहिए. अगर आप लगातार अपनी नींद को इग्नोर करेंगे, तो एक समय बाद बॉडी सिग्नल देना शुरू कर देगी.लेट नाइट कभी-कभार ठीक है  लेकिन अगर ये आपकी डेली हैबिट बन चुकी है, तो अब टाइम है रीसेट करने का.

तो आज ही एक डिसीजन लीजिए आप अपनी स्लीप से समझौता नहीं करेंगे। क्योंकि क्वालिटी स्लीप सिर्फ कम्फर्ट नहीं, बल्कि आपकी हार्ट सिक्योरिटी है.स्टे हेल्दी, स्टे स्मार्ट, और अपनी लाइफस्टाइल को अपग्रेड कीजिए.

Published at: 28 Feb 2026 12:28 PM (IST)
Tags:Health newsHealth care tips Late night sleep disorderHeart deseaseLate Night Sleeping Side EffectsSleep and Heart HealthIrregular SleepHeart RiskCardiovascular Disease RiskHeart Health Tips

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