☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. Trending

वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट 2026  में भारत की बेटी रूबल ने रचा इतिहास,139 देश को पछाड़ कर जीता खिताब  

वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट 2026  में भारत की बेटी रूबल ने रचा इतिहास,139 देश को पछाड़ कर जीता खिताब  

टीएनपी (TNP):  आज पूरी दुनिया में भारत की एक ऐसी ही बेटी की चर्चा हो रही है, जिसने झुग्गियों की बदरंग दीवारों को शिक्षा के कैनवास में बदल दिया. हम बात कर रहे हैं रूबल नागी की. दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट 2026 के मंच पर जब रूबल नागी के नाम की घोषणा हुई, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. रूबल नागी ने दुनिया भर के 139 देशों से आए करीब 5,000 नामांकनों को पछाड़ते हुए ‘ग्लोबल टीचर प्राइज 2026’ अपने नाम किया. इस सम्मान के साथ उन्हें 10 लाख डॉलर, यानी करीब 8.3 करोड़ रुपये की इनामी राशि भी मिली है.

कौन है रूबल नागी?

रूबल नागी का जन्म जम्मू-कश्मीर में हुआ था. वे भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल ज्ञान सिंह सूडान की बेटी हैं. अनुशासन, सेवा और समाज के लिए कुछ करने की भावना उन्हें विरासत में मिली. शुरुआती पढ़ाई के बाद शादी के पश्चात वे मुंबई शिफ्ट हो गईं. रूबल सिर्फ एक सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि एक जानी-मानी आर्टिस्ट और मूर्तिकार हैं. उनकी असली पहचान एक शिक्षक के रूप में बनी, साल 2022 में उनकी किताब The Slum Queen प्रकाशित हुई, जिसमें उनके संघर्ष और समाज परिवर्तन की यात्रा को बखूबी बताया गया है।

कैसे शुरू हुआ बच्चों को पढ़ाने का सफर?

रूबल नागी का यह प्रेरणादायक सफर आज से करीब 24 साल पहले शुरू हुआ. उस समय वे एक छोटी सी आर्ट वर्कशॉप चला रही थीं. इसी दौरान उनकी मुलाकात एक ऐसे बच्चे से हुई, जिसने अपने जीवन में कभी पेंसिल तक नहीं देखी थी. यही पल उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया. रूबल ने सिर्फ 30 बच्चों के साथ एक वर्कशॉप शुरू की. उनका मानना था कि कला के जरिए बच्चों को शिक्षा की ओर आकर्षित किया जा सकता है. उन्होंने झुग्गियों की बदहाल दीवारों पर शैक्षिक म्यूरल्स बनाना शुरू किया. इन दीवारों पर बने चित्रों से बच्चे अक्षर, संख्या और रंग सीखने लगे. जहाँ स्कूल नहीं थे, वहीं ये दीवारें ब्लैकबोर्ड बन गईं.

30 बच्चों से 10 लाख तक का सफर

जो पहल 30 बच्चों से शुरू हुई थी, वह आज एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुकी है. रूबल नागी ने ‘रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन’ की स्थापना की. आज इस संस्था के तहत पूरे भारत में 800 से अधिक लर्निंग सेंटर संचालित हो रहे हैं. अब तक 10 लाख से ज्यादा बच्चे इस मिशन से जुड़ चुके हैं. रूबल और उनकी टीम न केवल बच्चों को पढ़ाती है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा के स्कूलों से जोड़ने का भी काम करती है. मुंबई जैसे बड़े शहरों में किए गए उनके प्रोजेक्ट्स ने पूरे स्लम इलाकों की तस्वीर बदल दी है, जिससे बच्चों के रहने और सीखने का माहौल बेहतर हुआ है.

 क्या है ग्लोबल टीचर प्राइज?

ग्लोबल टीचर प्राइज दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण सम्मानों में से एक है. यह अवॉर्ड वर्की फाउंडेशन (Varkey Foundation) द्वारा दिया जाता है, जिसकी स्थापना सनी वर्की ने की थी. यह सम्मान उन शिक्षकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने समुदाय और समाज में शिक्षा के जरिए असाधारण बदलाव लाया हो.

इनामी राशि का क्या करेंगी रूबल नागी?

अक्सर लोग इतनी बड़ी राशि जीतने के बाद अपनी सुख-सुविधाओं के बारे में सोचते हैं, लेकिन रूबल नागी ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना है. उन्होंने घोषणा की है कि वे इस 8.3 करोड़ रुपये की राशि से एक ऐसा इंस्टीट्यूट बनाएंगी, जहाँ गरीब और वंचित बच्चों को मुफ्त वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी. उनका सपना है कि भारत का कोई भी बच्चा, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा सका, वह हुनर सीखकर अपने पैरों पर खड़ा हो सके.

Published at:09 Feb 2026 08:25 AM (IST)
Tags:Rubal Naghi made history by winning the Global Teacher Prizeand also received a prize money of $1 millionwhich is approximately 8.3 crore rupees.made historyRubal NaghDubaiWorld Governments Summit 2026EducationteacherRubalRubal Naghi
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.