टीएनपी डेस्क (TNP DESK): रांची पुलिस के लिए राहत की सांस और आम लोगों के लिए सुकून की खबर आखिरकार सामने आ गई. 12 दिनों से लापता अंश और अंशिका को पुलिस ने बरामद कर लिया है. बच्चों के सुरक्षित मिलने के साथ ही एक ऐसा मामला खत्म हुआ, जिसने पूरे रांची ही नहीं, बल्कि राज्यभर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, हर जगह लोगों का गुस्सा और चिंता साफ नजर आ रही थी. आखिरकार भारी दबाव और लगातार जांच के बाद रांची पुलिस को कामयाबी मिली.
कैसे लापता हुए अंश–अंशिक
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 2 जनवरी को घर के पास के दुकान से बच्चे बिस्किट लेने गए थे. तभी अंश और अंशिका अचानक लापता हो गए. दोनों भाई-बहन के गायब होने की खबर सामने आते ही परिवार में कोहराम मच गया. परिजनों ने तुरंत स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती दिनों में पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया. बच्चों की उम्र कम होने के कारण मामला और भी संवेदनशील हो गया था. शुरुआत में पुलिस ने इसे सामान्य गुमशुदगी का मामला मानते हुए आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रिश्तेदारों के घर और संभावित ठिकानों पर छानबीन की गई, लेकिन हर बार हाथ खाली लौटना पड़ा.
12 दिन तक बढ़ता रहा दबाव
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, लोगों का धैर्य जवाब देने लगा। सोशल मीडिया पर #FindAnshAnshika जैसे ट्रेंड चलने लगे. स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन और आम नागरिक पुलिस पर सवाल उठाने लगे. आरोप लगने लगे कि अगर समय रहते सख्ती दिखाई जाती तो बच्चों का पता जल्दी चल सकता था.
परिजनों का दर्द कैमरों के सामने आ गया, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया. राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा उठने लगा. विपक्ष ने पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए, वहीं सत्तापक्ष की ओर से जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया.
जांच में आई तेजी, बदली रणनीति
लगातार बढ़ते दबाव के बीच रांची पुलिस ने अपनी रणनीति बदली. एसआईटी का गठन किया गया और तकनीकी जांच को तेज किया गया. मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की गतिविधियों पर फोकस किया गया. पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की और पुराने सुरागों को नए सिरे से खंगाला.
इसी दौरान पुलिस को अहम जानकारी मिली, जिससे जांच की दिशा बदल गई. सूत्रों के अनुसार, बच्चों को रांची से बाहर ले जाने की आशंका मजबूत हुई, जिसके बाद आसपास के जिलों में भी तलाश शुरू की गई.
रामगढ़ के चितरपुर में मिला सुराग
आखिरकार पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि अंश और अंशिका रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके में हैं. सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई. रांची से एसपी खुद टीम के साथ बच्चों को लाने के लिए रवाना हुए, जिससे मामले की गंभीरता साफ झलकती है.
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया. बच्चों को किसी तरह की शारीरिक क्षति नहीं पहुंची थी, जो इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी राहत वाली बात रही.
दो आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
इस मामले में पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है. उनसे पूछताछ की जा रही है कि बच्चों को क्यों और किस मकसद से ले जाया गया था. हालांकि पुलिस फिलहाल पूरे मामले का खुलासा कुछ देर में करेगी.
बच्चों के मिलने से परिवार को राहत
अंश और अंशिका के मिलने की खबर जैसे ही सामने आई, परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। 12 दिनों से जिस डर और अनिश्चितता में परिवार जी रहा था, वह आखिरकार खत्म हुआ. परिजनों ने पुलिस और उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस दौरान उनका साथ दिया.
पुलिस की साख पर लगा था सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती 48 घंटे कितने अहम होते हैं. भले ही अंत में बच्चों की बरामदगी हो गई हो, लेकिन 12 दिन का समय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल छोड़ जाता है.
फिलहाल बच्चों के सुरक्षित मिलने से रांची पुलिस की साख किसी हद तक बच गई है, लेकिन यह मामला लंबे समय तक एक उदाहरण के तौर पर याद रखा जाएगा कि पब्लिक प्रेशर और सतर्कता किस तरह सिस्टम को हरकत में ला सकती है.
