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क्या 2024 में Ram Sethu भी होगा भाजपा का चुनावी मुद्दा! पार्टी ने शुरू की राष्ट्रीय विरासत घोषित करने की प्रक्रिया तेज

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 1:27:33 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): “राम” भारत के करोड़ों हिन्दुओं के आस्था हैं और राम से जुड़ा है “राम सेतु”. राम सेतु को लेकर आज तक लोगों की राय अलग-अलग है. कोई राम सेतु को काल्पनिक बताते है तो इसे भगवान राम के द्वारा बनाई गई एक अनोखी विरासत. अब राम सेतु को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार की संस्कृति मंत्रालय ने इसे “राष्ट्रीय विरासत स्मारक” (National Heritage Monument) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इतना ही नहीं इसकी जानकारी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दे दी है. जिसके बाद कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को मंत्रायल के साथ मिलकर संबंधित कागजात कोर्ट में दाखिल करने की अनुमति दे दी है. 

कोर्ट में सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी याचिका 

बता दें कि कोर्ट में रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग को लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर की थी. भाजपा नेता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दाखिल करने का वादा किया था और कैबिनेट सचिव को अदालत में तलब किया जाना चाहिए. वहीं, उन्होंने ये भी कहा कि सॉलिसिटर जनरल की ओर से 12 दिसंबर तक जवाब दाखिल करना था. लेकिन अभी तक उनके ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया. इस मामले पर जनरल ने कहा कि मामला विचाराधीन है और उस पर विचार चल रहा है.   

राम सेतु का अस्तित्व केंद्र ने स्वीकारा 
राम सेतु के अस्तित्व को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि वो पहला मामला जीत चुके हैं. केंद्र सरकार ने राम सेतु के अस्तित्व को मान लिया है.

क्या है राम सेतु? 
दरअसल, रामसेतु तमिल, रामर, पालम, मलयालम, तमिलनाडु, भारत के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप और श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य भगवान राम और उनकी वानर सेना द्वारा सीता माता को रावण से मुक्त कराने के लिए बनाई गई एक श्रृंखला (मार्ग) है. वहीं, भौगोलिक प्रमाणों से यह पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत और श्रीलंका को भू-मार्ग से आपस में जोड़ता था. हिन्दु पुराणों की मान्यताओं के अनुसार इस सेतु का निर्माण अयोध्या के राजा राम की सेना के दो सैनिक जो की वानर थे, जिनका वर्णन प्रमुखत नल-नील नाम से रामायण  में मिलता है, उनके द्वारा किया गया था.

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