टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक दर्दनाक खबर ने सबको झकझोर दिया। राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का चार्टर्ड विमान बुधवार सुबह बारामती के पास लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई. मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए अजित पवार का प्लेन 8 बजकर 45 मिनट पर बारामती में लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ. DGCA ने बताया है कि हादसे में मौजूद सभी लोगों की मौत हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अजीत पवार जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ. महज 20 साल की उम्र से राजनीति में एंट्री लेने वाले अजित पवार पांचवी बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम थे. उनका करीब 44 साल लंबा राजनीतिक करियर एक ऐसे नेता की कहानी कहता है जो हमेशा सत्ता के करीब रहा. आइए जानते हैं उनके राजनीतिक जीवन के बारे में.
1982 में को-ऑपरेटिव चुनाव से की थी शुरुआत
अजित पवार ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1982 में को-ऑपरेटिव चुनाव से की थी. तब को-ऑपरेटिव चुनाव को महाराष्ट्र की सत्ता की चाभी माना जाता था. साल 1991, वह सुनहरा वक्त जिसने पूरी की अजित पवार की हर मुराद, फिर हमेशा रहे सत्ता के रथ पर सवार अजित पवार ने को-ऑपरेटिव चुनाव से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और फिर डिप्टी सीएम की कुर्सी तक पहुंचे.
1991 में मिली सबसे बड़ी कामयाबी
राजनीतिक कामयाबी के लिहाज के साल 1991 अजित पवार के लिए काफी मायने रखता है. इसी साल वह पुणे डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन चुने गए. 1991 में ही उन्होंने बारामाती लोकसभा सीट का भी चुनाव जीता. अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के लिए बारामती सीट छोड़ दी. बता दें उपचुनाव जीतने के बाद शरद पवार पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में भारत के रक्षा मंत्री बन गए.
जून 1991 में अजित पवार को कृषि और बिजली राज्य मंत्री का पद मिला. फिर जल आपूर्ति, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे पद भी संभाले. उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार जीत दर्ज कर क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रखा
साल 2019 में अजित पवार के राजनीतिक जीवन में काफी मायने रखता है क्योंकि उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से पहली बार राजनीतिक बगावत की और खुद डिप्टी सीएम बन गए. हालांकि तीन दिन बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया और देवेंद्र फड़णवीस सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया इससे भाजपा सरकार गिर गई. जुलाई 2023 में एक बार फिर अजित पवार ने शरद पवार के खिलाफ बिगुल फूंका और एनसीपी का विभाजन हो गया. अजित भाजपा और शिवसेना शिंदे के साथ सरकार में शामिल हो गए. पवार ने एनसीपी कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज खड़ी कर ली थी जो उनके प्रति वफादार थी, न की चाचा शरद पवार के प्रति.
2024 में लोकसभा में गम तो विधानसभा में खुशी
2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार पहली बार शरद पवार से अलग होकर चुनाव लड़े. पर सिर्फ एक सीट हासिल कर पाए. पर जब वह इसी साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उतरे तो उन्हें 41 सीटें मिलीं.
