TNP DESK- झारखंड की गठबंधन सरकार में सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा. सरकार की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस अब विपक्ष की भाषा बोलती नजर आ रही है. खनिज संपदा से भरपूर राज्य में अवैध खनन और परिवहन को लेकर जहां भाजपा पहले से ही हेमंत सरकार पर हमलावर रही है, वहीं अब कांग्रेस के तेवर भी अचानक तल्ख हो गए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई गठबंधन की गांठ ढीली हो रही है या फिर यह जनता के सामने ‘सियासी नाटक’ का हिस्सा है?
“विषैला सांप” बयान से भड़की आग, कांग्रेस का पलटवार
झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य द्वारा कांग्रेस को “विषैला सांप” कहे जाने के बाद सियासी तापमान अचानक बढ़ गया. यह बयान कांग्रेस को नागवार गुजरा और पार्टी ने सीधे अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
प्रदेश प्रभारी के. राजू ने बिना लाग लपेट के आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया बेहद मजबूत हो चुका है, सरकार उन माफियाओं के दबाव में काम कर रही है, जिलों के उपायुक्त तक इस खेल में शामिल हैं.उन्होंने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत भूस्वामियों को उनका हक नहीं मिल रहा और प्रशासन माफियाओं के इशारे पर काम कर रहा है.
प्रदीप यादव का ‘बालू बम’, प्रशासन पर सीधा हमला
प्रदेश प्रभारी के बयान की गूंज थमी भी नहीं थी कि कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने गोड्डा के पथरगामा अंचल में गेरुआ नदी से हो रहे अवैध बालू खनन को लेकर बड़ा खुलासा कर दिया. उन्होंने दावा किया कि रोज 150 हाईवा से बालू का परिवहन हो रहा है. प्रति हाईवा ₹18,500 की अवैध वसूली, यानी हर दिन ₹27.75 लाख की काली कमाई हो रही है. उन्होंने सवाल दागा कि इतनी बड़ी लूट के बावजूद प्रशासन चुप क्यों है?”
जनता का नुकसान, माफियाओं का फायदा
प्रदीप यादव ने चेताया कि अवैध खनन से गेरुआ नदी का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और खेत बंजर हो रहे हैं. साथ ही, बालू ढोने वाले वाहनों से हो रही दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई.
टास्क फोर्स पर सवाल, आंदोलन की चेतावनी
प्रदीप यादव ने जिला खनन टास्क फोर्स और अन्य एजेंसियों को पूरी तरह विफल करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रशासन की नहीं, पूरी व्यवस्था की नाकामी है.”
उन्होंने मांग की कि अवैध बालू उठाव पर तत्काल स्थायी रोक लगे, 6 महीने की अवैध वसूली की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन होगा.
बड़ा सवाल: गठबंधन में दरार या ‘डैमेज कंट्रोल’?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल (पश्चिम बंगाल और असम) के बीच गठबंधन सहयोगियों के बीच बढ़ती बयानबाजी महज संयोग नहीं है. पहले बिहार चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर तनाव और अब खनन जैसे गंभीर मुद्दे पर खुली जंग, यह संकेत है कि अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है.अब देखना दिलचस्प होगा कि यह टकराव सच में किसी बड़े सियासी बदलाव की आहट है या फिर जनता की नजरों में ‘एक्टिव’ दिखने की कोशिश. फिलहाल, सवाल यही है कि सरकार के भीतर ही विपक्ष क्यों पैदा हो रहा है?