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खतियान एफेक्ट: संथाल में किसे होगा फायदा किसे नुकसान, जानिए कितने प्रतिशत लोग होंगे लाभान्वित

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 11:30:02 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड की हेमंत सोरेन कैबिनेट ने 1932 के खातियान को स्थानीयता का आधार माना है. कैबिनेट से प्रस्ताव पास होते ही राज्य के कई हिस्सों में खुशियां मनाई जा रही हैं तो कई जगहों पर इसका विरोध भी हो रहा है. दरअसल, झारखंड में कुल 24 जिले और पांच प्रमंडल हैं. इस खबर में हम आपको संथाल परगना प्रमंडल (Santhal Pargana Division) के बारे में बतायेंगे. हम इस खबर के जरिए बतायेंगे कि 1932 के बाद किस राजनीतिक दल को कितना फायदा होगा और किसे इसका नुकसान सहना पड़ेगा. इसके अलावा 1932 पास होने के बाद प्रमंडल के कितने जिलो में इसका समर्धन या विरोध हुआ और कितने लोगों को यह प्रभावित करेगा.

संथाल परगना प्रमंडल

संथाल परगना प्रमंडल के अंतरगत कुल 06 जिले आता है. जिसमें दुमका, देवघर, साहेबगंज, गोड्डा, पाकुड़ और जामताड़ा शामिल हैं. इस प्रमंडल की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 70 लाख है, जिसमें 28 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासी समुदाय की है और 45 से 50 प्रतिशत मूलवासियों की. हालांकि इस प्रमंडल में वैसे लोगों की संख्या भी काफी है जिनके पास 1932 का खतियान नहीं है. वैसे लोग पिछले 40 से 50 साल के अंदर बिहार और पश्चिम बंगाल से आकर बसे हैं. इनकी भी आबादी बढ़ते-बढ़ते 20 से 25% तक पहुंच गई है. इनमें से अधिकांश लोग देवघर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और दुमका जिले में निवास करते हैं.

संथाल में राजनीतिक असर

संथाल परगना प्रमंडल में कुल 18 विधानसभा सीट और तीन लोकसभा सीट है. 18 विधानसभा सीट में से सात सीट अनूसुचित जनजाति (ST) के लिए रिजर्व है और सभी सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का कब्जा है. वहीं, तीन लोकसभा सीट में से दो सीट ST के रिजर्व है. तीन सीट में से वर्तमान में दो लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है वहीं, एक सीट पर जेएमएम का कब्जा है. मिली जानकारी के अनुसार 75 प्रतिशत से अधिक आबादी के पास 1932 का खतियान है. जबकि 20 से 25 प्रतिशत लोगों के पास ही खतियान नहीं है. ऐसे में माना ये जा रहा है कि 1932 के बाद संथाल में महागठबंधन और खासकर जेएमएम को काफी फायदा हो सकता है.

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क्या कहते हैं BJP सांसद सुनील सोरेन

दुमका लोकसभा सीट से भाजपा सांसद सुनील सोरेन (Sunil Soren) ने 1932 पर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि मैं भी इसका विरोधी नहीं हूं लेकिन मुख्यमंत्री ने लोगों को दिग्भ्रमित करने के लिए यह घोषणा की है. ऐसा प्रयास काफी पहले भी बाबूलाल मरांडी के द्वारा हुआ था जो धरातल पर नहीं उतरा. वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी जानते हैं कि इसका अंजाम क्या होगा, यह होने वाला नहीं है. यह सब राज्य के माहौल को अस्थिर करने के लिए किया गया है.

क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार

1932 कैबिनेट से पास होने के बाद राजनीतिक जानकार इसे वर्तमान हेमंत सरकार का मास्टर स्टॉक बता रहे हैं. जानकारों का मानना है कि इसे महागठबंधन सरकार खासकर जेएमएम को काफी फायदा होगा. संथाल में पहले से भी जेएमएम मजबूत है. बावजूद इसके 1932 के बाद जेएमएम को आने वाले समय में बड़ा फायदा मिल सकता है. राजनीतिक जानकार की मानें तो आने वाले चुनाव में 1932 का असर दिख सकता है और जेएमएम को काफी बढ़त मिल सकती है.  

नोट: खतियान एफेक्ट की यह पहली स्टोरी है आने वाले दिनों में हम एक-एक कर आपको बाकी चारों प्रमंडल की कहानी से अपडेट करायेंगे.  

Tags:News

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