टीएनपी डेस्क(TNP DESK):झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में वैसे तो कई सरकारी अस्पताल है, लेकिन एमजीएम अस्पताल को कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल होने का गौरव प्राप्त है.साल 1961 में स्थापित यह अस्पताल कई दशकों से गरीब और असहाय लोगों की सेवा कर रहा है.समय पर इलाज मिलने की वजह से यहां कई लोगों की जान भी बची है.
दूसरे राज्य से भी मरीज़ इलाज करवाने आते है
केवल जमशेदपुर और झारखंड ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी मरीज एमजीएम अस्पताल में इलाज कराने पहुंचते है.यहां कई विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात है, जो गंभीर बीमारियों से लेकर सामान्य सर्दी-बुखार तक का इलाज करते है. मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है.
जानिए MGM की खासियत
एमजीएम अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कम खर्च में बेहतर इलाज किया जाता है, जिससे गरीब और असहाय लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ नहीं बढ़ता. अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सेवा, बच्चों का इलाज, महिला रोग विभाग, सर्जरी और चिकित्सा जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद है.अस्पताल परिसर काफी बड़ा है, जहां एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया जाता है.
गरीबों के लिए सबसे बड़ा सहारा
एमजीएम अस्पताल गंभीर बीमारियों, आपातकालीन इलाज और सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में गरीबों के लिए सबसे बड़ा सहारा माना जाता है. जमशेदपुर और आसपास के लोगों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग यहां मुफ्त या बेहद कम खर्च में इलाज करा पाते है.जमशेदपुर का एमजीएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पिछले कई दशकों से गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद का बड़ा केंद्र बना हुआ है.आज भी लोगों का भरोसा बनाए हुए है और लगातार स्वास्थ्य सेवाएं देने में जुटा हुआ है.
इलाज के दौरान उन पर आर्थिक बोझ भी कम
हालांकि, कभी-कभी एमजीएम अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों के इलाज को लेकर सवाल भी उठते है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एमजीएम अस्पताल कोल्हान की शान है.यहां गरीब और असहाय लोग बिना झिझक इलाज के लिए पहुंचते है, उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती है और स्वस्थ होकर अपने घर लौटते है. सबसे बड़ी बात यह है कि इलाज के दौरान उन पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ता है.