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हाय रे सिस्टम! मासूम के पोस्टमार्टम के लिए आदिवासी से 10 हजार मांगा, शव वाहन नहीं दिया तो बेबस बाप बाइक पर ले गया डेडबॉडी

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 5:18:21 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों के विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है. वादे किए जाते हैं कि ऐसी व्यवस्था दे रहे हैं कि शायद ही देश का कोई राज्य देता होगा, लेकिन सिस्टम तो ऐसा है कि मानों घुन लगा हुआ है, यह सुधरने का नाम नहीं लेता है. तभी तो एक मासूम की मौत पर पोस्टमार्टम के लिए ₹10000 की मांग की जाती है. इतना ही नहीं हंगामा करने के बाद पोस्टमार्टम किसी तरह हो जाता है. पर बच्चे के शव को घर तक पहुंचाने के लिए शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाता. नतीजा यह कि बाप कलेजे पर पत्थर रखकर बाइक से मासूम का शव लेकर घर जाता है. इस मामले में हर कोई अपना पलड़ा झाड़ते दिखा. आखिरकार जब मीडिया में खबरें आई तो मंत्री का एक्शन देखने को मिला और संबंधित डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया, वहीं बीएमओ को सस्पेंड किया गया है.

जानिए क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में डाबड़ी गांव है, यहां पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई. जब बच्चे डूबे तो इस आस में परिजन लेकर अस्पताल पहुंचे कि वह जीवित होंगे. डॉक्टर भगवान का रूप है तो बच्चे को बचा लेंगे, लेकिन वहां पहले मौत की पुष्टि हुई और फिर पैसे का खेल शुरू हुआ. मामला लंद्र विकासखंड के सिलसिला गांव का है. बताया जा रहा है कि मृतक शिवा गिरी और विनोद गिरी के पुत्र जगन और सूरज खेलने के दौरान तालाब में डूब गए थे. परिवार के लोगों ने बच्चों को रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां डॉक्टर ने मृत घोषित किया. पोस्टमार्टम के लिए 10 हजार की रिश्वत मांग ली. परिजन के पास इतना पैसा नहीं था वह रोते गिड़गिड़ाते रहें, लेकिन किसी ने नहीं सुना. आखिरकार दोनों के पिता मोटरसाइकिल पर शव को लेकर अपने गांव सिलसिला निकल गए.

इसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई सरकार की किरकिरी होने लगी तो वापस से दोनों बच्चों का शव अस्पताल लाया गया. इसके बाद पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन उसके बाद फिर डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन का अमानवीय चेहरा देखने को मिला. पोस्टमार्टम करने के बाद शव को ले जाने के लिए अंतिम यात्रा वाहन नहीं दिया गया. जब वाहम नहीं मिला तो बेबस बाप बाइक पर ही बच्चों की लाश लेकर घर की ओर निकल गए.

जब यह मामला मीडिया में सुर्खियों में बना तब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रिश्वत के आरोप को गलत बता दिया. उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने केवल नियम का पालन किया और बिना चीर फाड़ के रिपोर्ट देने से मना किया था, हालांकि उन्होंने जांच के लिए टीम बनाई है.

सुबे के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी ने मामले को गंभीरता से लिया और डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया. वहीं ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को सस्पेंड किया है. लेकिन सवाल कई छोड़ गया कि आखिर आदिवासियों के नाम पर पूरी राजनीति होती है और इन्हें एक एंबुलेंस तक मुहैया नहीं कराई जाती. यह सच्चाई दिखती है कि सरकार कितना संवेदनशील है अपने बातों और वादों को लेकर.

रिपोर्ट-समीर

 

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