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बिहार में अब नहीं रहेंगे नीतीशे कुमार, नीतीश कुमार के साथ मार्च महीने का कैसे जुड़ता रहा है अच्छा -बुरा सम्बन्ध,पढ़िए डिटेल्स

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 6, 2026, 1:04:29 PM

TNP DESK- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी "बागडोर"  भाजपा को सौंप कर अब दिल्ली की तैयारी में हैं.  बिहार की 2 दशकों की राजनीति की चर्चा नीतीश कुमार के बगैर अधूरी कही  जा सकती है.  लेकिन मार्च महीने का नीतीश कुमार के उतार-चढ़ाव के साथ गहरा संबंध रहा है.  वह 75 साल की आयु मार्च में पूरी  की.  5 मार्च को उन्होंने  राज्यसभा जाने की घोषणा की.  अब थोड़ा पीछे चलते हैं तो मार्च 2005 में ही नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे.  उसके बाद नीतीश कुमार ने बिहार में "सुशासन बाबू" का तमगा  अपने नाम कर लिया।  हालांकि इसके लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा.  नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के कल्याण बिगहा  में हुआ था.  उनके पिता कविराज राम लखन सिंह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे.  नीतीश कुमार बिहार कॉलेज आफ इंजीनियरिंग से 1972 में इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की डिग्री पाई. 

 उन्होंने बिहार इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका मन वहां लग नहीं रहा था.  उसके बाद बिहार में जयप्रकाश आंदोलन की शुरुआत हुई.  फिर 1974 में नीतीश कुमार जयप्रकाश आंदोलन में शामिल हो गए.  1973 में उनकी शादी मंजू कुमारी सिंह से हुई,  1977 में वह विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन हार मिली।   फिर 1980 में भी चुनाव में उन्हें हार  का सामना करना पड़ा.  1985 में वह विधानसभा के सदस्य चुने गए.  फिर 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने.  आगे 1989 में जनता दल के सचिव बने.  बात इतनी ही नहीं है, 1990 में लालू प्रसाद के उदय में भी नीतीश कुमार की भूमिका रही.  उसके बाद नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की दूरियां बढ़ती गई .  1994 में वह लालू प्रसाद से अलग हो गए.  उसके बाद लालू प्रसाद के खिलाफ उन्होंने अभियान भी शुरू किया।  उन्होंने समता पार्टी का गठन किया और बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया।  2014 में वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 

 कारण बताया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार हुई है.  उसके बाद जीतन राम मांझी को उन्होंने मुख्यमंत्री बनवा दिया।  लेकिन जीतन राम मांझी उनकी उम्मीद पर खरे  नहीं उतरे, फिर उन्होंने 2015 में मुख्यमंत्री बनना स्वीकार किया।  पहली बार 2000 में वह मुख्यमंत्री बने, लेकिन 7 दिनों के अंदर ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.  उस समय 324 सदस्यों वाली विधानसभा में एनडीए के पास 151 विधायक थे.  तो लालू प्रसाद यादव के पास 159 विधायक थे.  यह सब देखते हुए नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया, उसके बाद वह साल 2000 में केंद्रीय कृषि मंत्री बने.  उसके बाद अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में वह रेलवे मिनिस्टर रहे.  नीतीश कुमार बिहार के दसवें  मुख्यमंत्री के रूप में 2025  में शपथ ली. 

आइये जानते है मुख्यमंत्री के रूप में उनका सफर -----नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री बने थे.  हालांकि, बहुमत न जुटा पाने की वजह से उन्हें 10 मार्च 2000 को पद से इस्तीफा देना पड़ा था.  इसके बाद बिहार में 2005 में हुए चुनाव में नीतीश भाजपा के समर्थन से दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए, 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर जनता ने नीतीश को ही सीएम बनाया ।  लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजह से उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।  इस दौरान उन्होंने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद सौंपा, हालांकि, 2015 में जब पार्टी में अंदरुनी कलह शुरू हुई, तो नीतीश ने मांझी को हटाकर एक बार फिर खुद सीएम पद ग्रहण किया। 

 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन) की एनडीए के खिलाफ जीत के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने, यह कुल पांचवीं बार रहा, जब नीतीश ने सीएम पद की शपथ ली.  फिर ,राजद और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया।  उन्होंने जुलाई 2017 में ही पद से इस्तीफा दिया और एक बार फिर एनडीए का दामन थाम कर सीएम पद पर काबिज हो गए.  2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने जीत हासिल की, हालांकि, जदयू की सीटें भाजपा के मुकाबले काफी घट गईं,  बावजूद नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ ली.  हालांकि, भाजपा में उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय तक पसोपेश की स्थिति रही, आगे  नीतीश ने एनडीए से अलग होने का एलान कर एक बार फिर इस्तीफा दे दिया। 

एनडीए से अलग होने के एलान के ठीक बाद नीतीश कुमार ने राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से जुड़ने का एलान कर दिया, इसी के साथ यह तय हो गया कि नीतीश कुमार अब आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ  लेंगे।  फिर  उन्होंने आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जनवरी 2024 में, भ्रष्टाचार की बात कह सीएम नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया।  महागठबंधन और खासकर तेजस्वी यादव पर गड़बड़ करने का आरोप लगाया।  नीतीश कुमार ने एक बार फिर एनडीए में शामिल हो गए और नौंवी बार उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. नवंबर 2025, में बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिलने के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए.  उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो   

 

 

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