☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. Trending

राजनीति के बड़े चेहरे मुलायम सिंह यादव का निधन, जानिए उनके पूरे Political Career के बारे में

राजनीति के बड़े चेहरे मुलायम सिंह यादव का निधन, जानिए उनके पूरे Political Career के बारे में

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव नहीं रहे. उनका निधन हो गया. उन्होंने 82 वर्ष की आयु में गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. वह काफी दिनों से अस्पताल में भर्ती थी, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी. 

मुलायम सिंह यादव को भले ही उनके राजनीति से जानते होंगे लेकिन राजनीति से पहले उन्होंने पहलवानी से लेकर टीचिंग तक में हाथ अजमाया. लेकिन मुलायम जैसे ही राजनीति में हाथ आजमाने पहुंचे उनका जीवन पूरी तरह बदल गया. मुलायम सिंह ने उत्तर प्रदेश में तीन बार सत्ता चलाई है. 

लोहियावादी और समाजवादी नेता माने जाते थे मुलायम सिंह

मुलायम सिंह यादव को जो लोग शुरुआती दौर से जानते हैं वो कहते हैं कि मुलायम पहले काफी जमीन से जुड़े हुए थे. वो कहते हैं कि मुलायम 80 के दशक में साइकिल से लंबी-लंबी सफर तय किया करते थे. लखनऊ में अक्सर उन्हें साइकिल से पत्रकारों के ऑफिस में जाते देखा जाता था. 80 के दशक में उन्हें लोहियावादी, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष नेता माना जाता था. लेकिन 80 के दशक में ही उन्होंने यूपी की राजनीति का पूरा धर्म गणित को समझा. किसानी बैकग्राउंड होने की वजह से उन्हें किसानों का पूरा समर्थन मिला. यादव भी उन्हें अपना नेता मानते थे. राम मंदिर आंदोलन के दौरान मुलायम सिंह के रुख ने उन्हें मुस्लिमों का नेता बना दिया था. धर्म, जाति की इस गणित के बदौलत ही उन्होंने काफी लंबे समय तक यूपी में सत्ता चलाया. 

दरअसल, ऐसा माना जाता है कि 80 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति पर वही शासन करता था, जिसने वहां की बहुसंख्यक जाति और धर्म के लोगों को अपनी तरफ कर लिया और इस मामले में मुलायम सिंह काफी समझदार मानें जाते थे. ऐसा कहा जाता है कि यूपी की राजनीति जिस जाति और धर्म की ओर जाती थी, मुलायम उन्हें अपनी ओर करने में माहिर थे. आपको बता दें कि मुलायम सिंह 55 साल तक राजनीतिक में एक्टिव रहे हैं. 

शुरुआती दौर में चौधरी चरण सिंह थे मुलायम के गुरू

राष्ट्रीय लोकदल पार्टी के कर्ताधर्ता चौधरी चरण सिंह थे. उस दौर में मुलायम सिंह वंशवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते और इंदिरा गांधी और कांग्रेस को कोसते थे. लेकिन राजनीति में वंशवाद की जड़ इतनी मजबूत है कि धीरे-धीरे वो भी वंशवाद की राजनीति में फंस गए. वहीं, मुलायम सिंह यादव की पकड़ क्षेत्र में काफी अच्छी होने के बावजूद चरण सिंह ने अमेरिका से लौटे अपने बेटे अजित सिंह को पार्टी की कमान देनी शुरू कर दी. जिसके बाद मुलायम सिंह का पार्टी और चरण सिंह से मोह भंग होने लगा.    

1992 में मुलायम ने बनाई नई पार्टी

चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद पार्टी दो गुट में टूट गई. राष्ट्रीय लोकदल का एक बड़ा कुनबा मुलायम के साथ आ गया. जिसके बाद 1992 में उन्होंने एक नई पार्टी का गठन किया, जिसका नाम समाजवादी पार्टी रखा गया और उसका चुनाव चिन्ह साइकिल रखा गया. कुछ जानकारों का कहना है कि 80 के दशक में वो साइकिल से ज्यादा सवारी करते थे इसलिए उन्होंने अपने पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल रखा था. 

राजनीति के गुण लोहिया और चरण सिंह से सीखा

60 के दशक में राममनोहर लोहिया और चरण सिंह से मुलायम सिंह यादव ने राजनीति के गुण सीखे. लोहिया ही उन्हें राजनीति में लेकर आए. लोहिया की ही संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने उन्हें 1967 में टिकट दिया और वह पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे. उसके बाद वह लगातार प्रदेश के चुनावों में जीतते रहे. विधानसभा तो कभी विधानपरिषद के सदस्य बनते रहे. उनकी पहली पार्टी अगर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी थी तो दूसरी पार्टी बनी चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय क्रांति दल. जिसमें वह 1968 में शामिल हुए. हालांकि चरण सिंह की पार्टी के साथ जब संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का विलय हुआ तो भारतीय लोकदल बन गया. ये मुलायम के सियासी पारी की तीसरी पार्टी बनी.

इमरजेंसी के दौरान गए थे जेल

मुलायम सिंह यादव और चौधरी चरण सिंह इमरजेंसी के दौरान जेल गए थे. सिर्फ ये दोनों ही नहीं बल्कि उस दौर के सभी जमीनी नेताओं को जेल जाना पड़ा था. जिसके बाद सभी लोगों ने एक साथ मिलकर कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने का प्लान बनाया. इस तर्ज पर भारतीय लोकदल का विलय अब नई बनी जनता पार्टी में हो गया. मुलायम सिंह मंत्री बन गए.   

भाई शिवपाल उनके बहुत काम आए

मुलायम सिंह की राजनीति 80 के दशक में काफी मुश्किल दौर से गुजर रही थी. उस समय उनपर कई बार हमले हुए. साजिश रची गई लेकिन हर बार उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने उन्हें बचाने में जान की बाजी भी लगा दी. इसी वजह से शिवपाल यादव हमेशा उनके करीबी सियासी सलाहकार बने रहे. मुलायम ने अपने राजनीतिक जीवन में लगभग सभी साथियों के साथ हाथ मिला लिया लेकिन एक पार्टी के साथ उन्होंने कभी हाथ नहीं मिलाया. मुलायम का एक स्टैंड उनके राजनीतिक करियर से आज तक कायम है, वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति उनका खिलाफत भरा दृष्टिकोण. हालांकि उन पर कई बार ये आरोप लगे हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी के प्रति कई बार साफ्ट हो जाते हैं. लेकिन वह जब तक सक्रिय राजनीति में रहे, जमीन से जुड़े रहे.

08 बार सांसद और 07 बार विधायक 

मुलायम सिंह यादव 1967 से लेकर 1996 तक 08 बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा के लिए चुने गए. एक बार 1982 से 87 तक विधान परिषद के सदस्य रहे. 1996 में ही उन्होंने लोकसभा का पहला चुनाव लड़ा और चुने गए. इसके बाद से अब तक 07 बार लोकसभा में पहुंच चुके हैं. अब भी लोकसभा सदस्य हैं. 1977 में वह पहली बार यूपी में पहली बार मंत्री बने. तब उन्हें कॉ-ऑपरेटिव और पशुपालन विभाग दिया गया. उसके बाद साल 1980 में लोकदल का अध्यक्ष पद संभाला. 1985-87 में उत्तर प्रदेश में जनता दल के अध्यक्ष रहे. पहली बार 1989 में यूपी के मुख्यमंत्री बने. 1993-95 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने. 2003 में तीसरी बार सीएम बने और चार साल तक सत्ता संभाला. 1996 में जब देवगौडा सरकार बनी, तब मुलायम उसमें केंद्र में रक्षा मंत्री का पद संभाला.

राजनीति के चलते पारिवारिक कलह भी झेला

पिछले साल ही समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिली, जब मुलायम के हर परिस्तिथि में साथ देने वाले भाई शिवपाल यादव ने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया. हालांकि बाद में दोनों में सुलह हो गई लेकिन अभी भी दोनों में वह लगाव नहीं देखने को मिल रहा जो पहले दिखता था. मगर, अब मुलायम सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनके निधन पर पूरे देश में शोक का माहौल है. देश के तमाम बड़े से लेकर आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं.

रिपोर्ट: विशाल कुमार

Published at:10 Oct 2022 10:11 AM (IST)
Tags:News
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.