TNP DESK- आज के दौर में युद्ध काफी ज्यादा बढ़ गया है देशों के बीच लेकिन आप यह सोच रहे होंगे कि युद्ध सैनिकों और हथियारों तक ही सीमित होगा लेकिन ऐसा नहीं है, अब युद्ध टेक्नोलॉजी द्वारा भी लड़ा जा सकता है. अब सवाल सिर्फ यही नहीं रहा कि किस देश के पास ज्यादा सैनिक है बल्कि ये है कि किसके पास कितना ज्यादा एडवांस्ड टेक्नॉलजी है. इसी विषय को लेकर अभी सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आने वाले समय में युद्ध कौन जीतेगा? सेना या टेक्नोलॉजी.
अगर हम पहले की बात करें, तो युद्ध पूरी तरह सैनिकों की ताकत,रणनीति और साहस पर निर्भर करता था. जंग में रहकर आमने सामने की लड़ाई होती है. जहा पर जीत सिर्फ उसी की होती है जिसकी सेना सबसे ज्यादा मजबूत हो ,लेकिन आज का दौर बिल्कुल अलग हो चुका है अब युद्ध की शुरुआत मैदान में नहीं, बल्कि स्क्रीन पर होती है.
टेक्नोलॉजी ने युद्ध के पूरे मायने को बदल डाला है. आज ड्रॉनस, सटेलाइट ,ai, सॉइबर अटैक और औटोमटेड हथियार जैसे टूल्स इस्तेमाल हो रहे हैं. अब बिना सीमा को पार किए भी किसी देश को काभी भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. साइबर वॉर के जरिए एक देश दूसरे देश की बैंक और नेटवर्क को ठप कर सकता है.
लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि सेना की जरूरत खत्म हो चुकी है? बिल्कुल भी नहीं.
टेक्नोलॉजी चाहे जितनी भी अड्वान्स हो जाए, उसे चलाने के लिए भी इंसान की जरूरत पड़ेगी . AI निर्णय ले सकता है, लेकिन सच्चाई और जमीनी हकीकत के लिए इंसान का होना बहुत जरूरी है युद्ध सिर्फ डेटा और मशीन का नहीं , बल्कि भावना , साहस और तुरंत निर्णय का भी खेल है.
सेना का सबसे बड़ा फायदा है , किसीभी चीज को जल्दी समझना. सैनिक किसी भी परिस्थिति में अपने आप को ढाल सकते हैं. चाहे मौसन कितना भी खराब ही क्यूँ न हो एक साहसी सेना मौके के हिसाब से अपना काम या यूं कह लीजिए वे लोग लड़ ही लेते हैं जंग. लेकिन यही चीज अभी तक मशीन के अंदर नहीं आया है.
वही दूसरी ओर , टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फाइदा है उसकी रफ्तार. जहा एक टारगेट को पाने के लिए लंबा समय लगता है वही ड्रोन या मिसाइल कुछ ही सेकंड में काम पूरा कर सकता है. इससे जोखिम भी कम होता है अकुरसी भी बढ़ती है.
भविष्य के जंग में सबसे बदलाव ये होगा की लड़ाई आमने- सामने कम और सिस्टम के अंदर ज्यादा होगा. यानि की जंग का मैदान पूरी तरह बदल जाएगा. अब लड़ाई हवा, जमीन और समुद्र के साथ-साथ साइबर स्पेस और स्पेस सटेलाइट में भी होगी.
इसका मतलब साफ है की जिस देश के पास मजबूत टेक्नोलॉजी और तयार सेना दोनों होंगे, वही आगे रहेगा. सिर्फ टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहना भी खतरा है, क्योंकि अगर सिस्टम हैक हो जाए या खराब हो जाए, तो पूरी रणनीति खराब हो सकती है.
एक और जरूरी बात यह है कि टेक्नोलॉजी का सबसे ज्यादा मिसयूज़ किया जाता है अगर गलत हाथों में पड़े तो काफी ज्यादा नुकसान भी हो सकता है.