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आदिवासी बेटी से शादी फिर जमीन पर कब्जा! शादी के लिए राजी ना होने पर कत्ल! जानिए क्या है खेल

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:19:16 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): देश का आदिवासी बाहुल्य राज्य झारखंड भले ही आदिवासियों के लिए बना हो लेकिन झारखंड की आदिवासी बेटियां यहां सुरक्षित नहीं हैं. राज्य में शासन करने वाले मुख्यमंत्री भले ही आदिवासी हो लेकिन आज भी झारखंड की आदिवासी बहु-बेटियां यहां बांग्लादेशी घुसपैठियों की सॉफ्ट टारगेट है. पहले इनसे प्रेम प्रसंग फिर शादी और बाद में इनकी अस्मिता से छेड़छाड़ होता आ रहा है. आए दिन ये घटना होती है. झारखंड बनने के बाद यहां की आदिवासी महिलायें सबसे ज्यादा असुरखित हैं. खासकर संथाल का जो इलाका है वो आदिवासी महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित बन गया है. और ये खुलासा हाल के दिनों में दायर मामला और मिले साक्ष्य के आधार पर हुआ है. बांग्लादेशी घुसपैठिया झारखंड की बेटियों को लव जिहाद का शिकार बना रहे हैं और आए दिन इसे टारगेट करते हैं लेकिन इस मामले में ना सरकार चेती है और न आम लोगों में इसको लेकर कोई जागरूकता है. यहां का कारनाम देख केरल स्टोरी की कहानियां भी फीकी पर जाती है. 

केरल और कश्मीर से बड़ा खेल

केरल स्टोरी और कश्मीर फाइल की सच्चाई पूरे देश ने देखा. लेकिन झारखंड में जिस तरह लव जिहाद का खेल खेला जा रहा है यह खेल कश्मीर और केरल से भी बड़ा है. आदिवासियों की जमीन से लेकर तंत्र तक में कब्जा जमाने की कोशिश जारी है. जिसमें स्थानीय प्रशासन की संलिप्ता से इनकार नहीं कर सकते हैं. यहां बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला सिर्फ राजनीतिक मुद्दा बन कर रह गया है. हाल के दिनों में कुछ ऐसे घटनाएं सामने आई है जो जो इस पूरे खेल का पोल खोल रही है. 

शादी से इनकार करने पर उतारा था मौत के घाट 

बात संथाल परगना के दुमका जिले की करें तो यह दुमका सूबे की उपराजधानी है. लेकिन जितना नाम दुमका का विकास के लिए नहीं हुआ उससे कई ज्यादा सुर्खियों में love Jihad के कारण रहा है. आप सभी को याद होगा इसी दुमका में आदिवासी बेटी अंकिता को मुस्लिम युवक जिसका नाम शाहरुख है, उसने किस तरह से प्रेम के जाल में फसाया. प्रेम के जाल में फंसाने के कुछ महीने बाद जब शाहरुख की सच्चाई उसे पता चली तो उसने दूरी बनाना शुरू कर दिया. लेकिन शाहरुख अंकिता पर शादी का दबाव बनाने लगा. शादी से इनकार करने पर उसपर तेजाब डाल कर उसे मौत के घाट उतार दिया. 

साहिबगंज में कटर से काट कर की गई थी रुबिका की हत्या 

इसके अलावा अगर बात साहिबगंज की करें यहां रुबिका पहाड़िन जो पहाड़िया जनजाति से आती थी. इसकी हत्या कईं टुकड़े में काट कर पति दिलदार अंसारी ने कर दिया था.रुबिका पहाड़िन के साथ कई महीनों से दिलदार रह रहा था.दोनों में प्यार हुआ फिर शादी.जब शादी हो गई इसके बाद दिलदार उसकी जमीन और घर का मालिक बन गया. बाद में रुबिका की हत्या कटर से काटकर कर दिया.

गैर आदिवासी से शादी कर चुनाव के मामले में थाना और प्रखण्ड की रिपोर्ट अलग

संथाल के मुद्दे को लेकर मोहम्मद दानिश डेनियल ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया है. जिसमें उन्होंने ऐसे तथ्य को दिखाया है, जिससे पूरा पुलिस प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है. सूचना के अधिकार से जिले के सभी विभागों से गैर आदिवासी से शादी करने वाली लड़कियों की सूची मांगी थी. लेकिन दुमका के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में पुलिस ने बताया कि ऐसा एक भी मामला नहीं है, लेकिन उसी प्रखंड और ग्राम सभा ने बताया कि एक ऐसी मुखिया है जिसने गैर आदिवासी से शादी कर चुनाव लड़ा है.

पुलिस और प्रशासन डाल रही पर्दा 

इस घटना के बाद पुलिस रेस हुई, पूरा तंत्र ऐसे काम करने लगा मानो अब कोई ऐसी वारदात यहां नहीं होगी लेकिन इसके बाद भी कई घटना घटी जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. हर बार आदिवासी बेटियों को टारगेट कर निशाना बनाने का काम किया जा रहा है. यहां की बेटियों को प्रेम जाल में फसा कर उनसे शादी और फिर चुनाव और जमीन पर कब्जे का खेल जारी है. लेकिन इन सब चीजों पर पुलिस और प्रशासन पर्दा डालने में लगा हुआ है.

एक ही प्रखंड और थाना की दो तरह की रिपोर्ट पूरे पुलिस महकमे को सवालों के घेरे में खड़ा कर देता है. दुमका के मुफस्सिल थाना से बताया गया है कि हमने जांच किया जिसमें पाया गया की इस थाना में किसी भी लड़की ने गैर आदिवासी से शादी नहीं किया है, जबकि इसी प्रखंड दुमका की ओर से बताया गया है कि दुधानी पंचायत की मुखिया जुली मराण्डी उर्फ सोनी सिन्हा गैर आदिवासी से शादी करने के बाद निर्वाचित हुए है.

कब मिलेगा आदिवासी बेटियों को इंसाफ 

चीजें सब सामने है लेकिन अगर कुछ पॉलिटीशियन को छोड़ दिया जाए तो किसी के लिए ये मुद्दा नहीं है . चूंकि आदिवासियों के नाम पर राजनीति कर झारखंड अलग राज्य तो बन गया लेकिन आज भी आदिवासियों महिलाओं की ना मुख्यमंत्री सुध ले रहे और ना कोई आदिवासी नेता. तो सवाल है कि आदिवासी बेटियों के लिए संभवतः झारखंड का निर्माण नहीं हुआ है लोगों की राजनीति और चालबाजी में समय तो गुजर जाता है लेकिन आज भी आदिवासी बेटियाँ बांग्लादेशी के निशाने पर है. आए दिन इनके साथ बलात्कार और हत्याएं हो रही है. अब देखना होगा कि आखिर इन लड़कियों की सुध कौन लेगा?

रिपोर्ट: समीर हुसैन 

 

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