✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. Trending

मकर संक्रांति विशेष : आज के दिन क्यों खाया जाता है चूड़ा-दही, क्या है तिल का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 7:54:00 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश में पहले मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता था पर अब यह त्योहार 15 जनवरी को मानाया जाने लगा है. ऐसे में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक आस्था के साथ मनाया जाता है, यह त्योहार देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ प्रसिद्ध है. बिहार और उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी पर्व, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में पोंगल, महाराष्ट्र और तेलंगाना में मकर संक्रांति, असम में भोगाली बिहू और पंजाब में लोहड़ी के नाम से जाना जाता है. नाम चाहे अलग हों, लेकिन पर्व का मूल भाव एक ही है, सूर्य उपासना और फसल उत्सव.

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है
मकर संक्रांति एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है. यह पर्व सौर पंचांग पर आधारित होने के कारण हर वर्ष लगभग एक ही तिथि को पड़ता है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है. इसे ऋतु परिवर्तन और नई फसलों के आगमन का संकेत माना जाता है. इस समय शीत ऋतु का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और खेतों में कृषि गतिविधियां तेज हो जाती हैं. इसी वजह से यह पर्व किसानों के लिए भी खास महत्व रखता है.

मकर संक्रांति को उत्तरायण क्यों कहा जाता है
मकर संक्रांति से सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा शुरू होती है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है. खगोलीय रूप से यह वह काल होता है जब सूर्य दक्षिणायन से निकलकर उत्तरायण में प्रवेश करता है. इसके बाद दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं. भारतीय दर्शन में दिन को प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, जबकि रात को अंधकार और नकारात्मकता से जोड़ा जाता है. इसलिए उत्तरायण को आध्यात्मिक रूप से शुभ और पुण्यकाल माना जाता है.

दही-चूड़ा और तिल खाने की परंपरा क्यों है खास
मकर संक्रांति पर खान-पान की परंपरा का विशेष महत्व है. अलग-अलग राज्यों में इस अवसर पर स्थानीय व्यंजन बनाए जाते हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश में दही-चूड़ा (दही और पोहा) खाने की परंपरा बेहद लोकप्रिय है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, दही-चूड़ा सूर्य देव को प्रिय है और इसे भोग के रूप में अर्पित करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य आता है. साथ ही यह हल्का, पौष्टिक और ठंड के मौसम के अनुकूल भोजन भी माना जाता है.

इस पर्व पर तिल का भी विशेष महत्व है. तिल से बने लड्डू, मिठाइयां और व्यंजन लगभग हर घर में तैयार किए जाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, तिल शरीर में ऊष्मा बनाए रखने में मदद करता है और सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है. धार्मिक दृष्टि से तिल को दान और पुण्य से जोड़ा गया है. मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान करने से पापों का नाश होता है और ग्रह दोष शांत होते हैं.

फसल, परंपरा और आस्था का पर्व
मकर संक्रांति पूरे देश में फसल के आगमन, सूर्य आराधना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है. भले ही इसके नाम और परंपराएं अलग-अलग हों, लेकिन इसका संदेश एक ही है, नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक उत्सव. यही कारण है कि मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति और परंपरा में एक विशेष स्थान रखती है.

Tags:Makar Sankranti SpecialMakar Sankrantiwhen is Makar SankrantiMakar Sankranti Special dishwhy we eat dahi churawhy eat til on Makar Sankrantiwhy we eat dahi cahuda on Makar Sankrantilatest newsbig newsMakar Sankranti 2026

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.