टीएनपी डेस्क (TNP DESK): ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जो हर वर्ष कम से कम चार और अधिकतम सात बार घटित होती है. जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है. इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, 3 मार्च 2026, मंगलवार को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण के कुछ ही दिनों बाद पड़ रहा यह ग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है.
पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर होगी और यह शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा. इसकी कुल अवधि लगभग साढ़े तीन घंटे की रहेगी. सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रभावी हो जाएगा. सूतक लगने के बाद से ही पूजा-पाठ, शुभ कार्य और मांगलिक आयोजन वर्जित माने जाते हैं.
यह चंद्र ग्रहण भारत, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में दिखाई देगा. जिन स्थानों पर ग्रहण दिखाई नहीं देगा, वहां सूतक मान्य नहीं माना जाएगा. इसलिए स्थानीय दृश्यता के आधार पर धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में भोजन बनाना और खाना टालना चाहिए. यदि पहले से भोजन तैयार हो, तो उसमें तुलसी का पत्ता डाल देना शुभ माना जाता है. हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को आवश्यकतानुसार भोजन करने की अनुमति होती है. ग्रहण के दौरान सोना, तेल मालिश करना, बाल या नाखून काटना और देव प्रतिमाओं को स्पर्श करना भी वर्जित बताया गया है.
शास्त्रों में ग्रहण काल को साधना और जप के लिए अत्यंत फलदायी समय माना गया है. इस दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या अपने इष्ट देव के मंत्र का जप करना शुभ रहता है. मान्यता है कि ग्रहण के समय किया गया जप और दान कई गुना फल देता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना, स्वच्छ वस्त्र पहनना, घर में गंगाजल का छिड़काव करना और विधि-विधान से पूजा करना उचित माना गया है. इसके साथ ही यथाशक्ति अन्न और धन का दान भी करना चाहिए.
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह ग्रहण राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में हलचल के संकेत दे सकता है. शासन व्यवस्था में बदलाव की चर्चाएं, सामाजिक आंदोलनों की संभावना और बाजार में अस्थिरता देखी जा सकती है. कुछ विशेषज्ञ वैश्विक स्तर पर तनाव, प्राकृतिक असंतुलन या तूफान जैसी घटनाओं की भी आशंका जता रहे हैं. हालांकि ये सभी आकलन ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं.
ध्यान रहे कि ग्रहण एक प्राकृतिक और वैज्ञानिक घटना है. इसे लेकर अंधविश्वास से बचते हुए जागरूक रहना जरूरी है. धार्मिक आस्था रखने वाले लोग परंपराओं का पालन कर सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक सोच बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
