TNPDESK:देश में नक्सलवाद खात्मे की डेड लाइन 31मार्च 2026 तय की गई है. इस डेडलाइन के एक दिन पहले लोकसभा में गृह मंत्री ने सरकार का जवाब दिया है. अब तक के अभियान पर पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में बहस हुई.नक्सलवाद की समस्या पर सभी राजनीतीक दल ने अपनी अपनी बात सदन के माध्यम से सरकार से पूछा है.
इस दौरान सदन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आखिर नक्सलवाद कभी भी विकास के पैमाने पर नहीं आया है. उन्होंने कहा कि आदिवासी और जल जंगल जमीन कि बात कर कुछ वाम पंती विचारधारा के लोग आदिवासी के नाम पर सरकार के खिलाफ शासन के खिलाफ गोलबंद किया है.वह गुमराह हो कर हथियार उठाने को मज़बूर हुए.
आदिवासी कभी भी अपने देश में संविधान के खिलाफ नहीं रहते. आदिवासी भगवान बिरसा मुंडा भी थे जिन्होंने देश के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी कभी भी आदिवासी माओवादी को अपना आदर्श नहीं मान सकता है.
देश में कुछ ऐसे लोग थे जो संसद का विरोध कर रहे थे. वह अपनी जानतानादालत में फैसला सुनाते थे. ना जाने कितने निर्दोष को फांसी में चढ़ा दिया गया. उनकी अदालत में ना कोई जज और ना ही कोई वकील था. वहां सब बस कुछ लोग फैसला करते और फिर फांसी पर लटका देने का काम करते थे.
उन्होंने कहा कि नक्सली कभी भी समाज के भला के लिए नहीं हो सकते है. नक्सलियो के देश के कितने मासूमों का ज़िन्दगी बर्बाद कर दिया. स्कूल कॉलेज को उड़ा दिया.
अमित शाह ने सदन में पूछा कि आखिर कुछ लोग नक्सली का समर्थन कर रहे है. लेकिन उनसे पूछना है कि वह आपके संसद का विरोध कर रहे है. आखिर आप उनका समर्थन क्यों कर रहे है. यह सोचने कि जरुरत है.
गृह मंत्री ने अर्बन नक्सल पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि देश के हजारों ऐसे लोग है जिनका मानना है कि नक्सलवाद गलत नहीं है. उनसे बात करने कि जरुरत है. लेकिन उनसे सवाल है कि आखिर क्या कभी सोचा कि बात किस्से होगी. जिसने बच्चों के स्कूल को उड़ा दिया. जिसने किसान को नुकसान पहुंचा. जिसने पांच हजार से अधिक जवानों को शहीद कर दिया.ये लोग भी नक्सल समर्थक है. खुद हथियार ना उठा कर गरीब और लाचार को हथियार थमा कर सरकार के खिलाफ उतारा है.