टिएनपी डेस्क (TNP DESK) : आज के युग में EMI शब्द हर आम आदमी के ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं. चाहे आपको गाड़ी खरीदनी हो, घर लेना हो, मोबाइल बदलना हो या फिर छुट्टियों पर जाना हो इन सब जरूरतों का एक ही आसान उपाये हैं EMI.
जहां पहले लोग सालों तक पैसे बचाकर चीजें खरीदते थे वहीं अब Buy Now, Pay Later का दौर चल रहा है. इसका मतलब ये हैं की जो भी समान आप खरीदना चाहते हैं वो तुरंत आपके पास आ जाएगा. सुनने में यह सुविधा लगती है, लेकिन क्या यह धीरे-धीरे हमें ये कर्जदार बना रही हैं?
EMI का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसमे महंगी चीज़े आसानी से खरीदी जा सकती हैं. आप एक साथ लाखों रुपये के समान लेने के बजाय, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देते हैं. इससे हमारी ज़िंदगी आसान हो जाती हैं जिसके कारण हमे अपने सपनों को जल्दी पूरा करना संभव हो जाता हैं.
लेकिन असली खेल यही से शुरू होता है, जब हर एक छोटी से छोटी या बड़ी चीज़े EMI पर मिलने लगे. जिसके कारण हम वो भी खरीदने लगते हैं, जिसकी हमें उतनी जरूरत नहीं होती सिर्फ इसलिए क्योंकि EMI के जरिए हम पैसे चुकाने लगते हैं और वो चीज लेना हमारे लिए आसान हो जाता हैं.
धीरे-धीरे यह एक आदत बन जाती है. एक EMI खत्म नहीं होती कि दूसरी शुरू हो जाती है, फोन की EMI, बाइक, फिर फर्नीचर, फिर क्रेडिट कार्ड का बिल अंत में नतीजा यही होता हैं की महीने की सैलरी आते ही उसका एक बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है.
आज के युग में यही वजह हैं की लोग कमा तो रहे हैं लेकिन बचा नहीं पा रहे. यह सिर्फ पैसों का ही नहीं बल्कि मानसिक दबाव भी बनाता हैं. हर महीने EMI चुकाने का प्रेशर, अचानक खर्च आने की चिंता, ये सब मिलकर तनाव बढ़ाते हैं. बहुत बार ऐसा होता हैं कि लोग EMI भरने के लिए अपनी पसंद का काम भी छोड़ देते हैं.
इन सब चीजों से सबसे ज्यादा फायदा होता बैंकों और कंपनियों को. काम ब्याज जैसे ऑफर्स हमारा ध्यान अपनी ओर खिचती हैं.
जब हम हर छोटी-बड़ी चीज EMI पर लेने लगते हैं, तो हम इसके जाल में फ़स जाते हैं. हमें यह समझना होगा कि EMI हमें सुविधा देती है, लेकिन अगर इसे सही तरीके से मैनेज न किया जाए, तो यह हमारी आज़ादी भी छीन सकती है.