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दिल्ली के उपराज्यपाल आम आदमी पार्टी के नेताओं पर करेंगे कानूनी कार्रवाई, जानिये क्या है पूरा मामला  

दिल्ली के उपराज्यपाल आम आदमी पार्टी के नेताओं पर करेंगे कानूनी कार्रवाई, जानिये क्या है पूरा मामला  

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): दिल्ली में सरकार और उपराज्यपाल के बीच खींचतान जारी है. जहां एक ओर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई रेड चली. वहीं अब आम आदमी पार्टी उपराज्यपाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है. इन आरोपों के बाद उपराज्यपाल कानूनी प्रक्रिया करने जा रहे हैं. उपराज्यपाल वीके सक्सेना, आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे, जिसमें सौरभ भारद्वाज, आतिशी, दुर्गेश पाठक और जैस्मीन शाह के नाम शामिल हैं.  आम आदमी पार्टी ने उपराज्यपाल पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.

आप ने आरोप लगाया था कि उपराज्यपाल 2016 की विमुद्रीकरण प्रक्रिया के दौरान एक घोटाले में शामिल थे और उनके खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है. सीबीआई पहले ही केवीआईसी के इशारे पर मामले की जांच कर चुकी है और चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. सीबीआई द्वारा खादी बोर्ड में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले वही लोग हैं जिन्होंने उपराज्यपाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. उपराज्यपाल ने आप नेताओं द्वारा लगाए गए इन मानहानिकारक और पथभ्रष्ट आरोपों को गंभीरता से लिया है और कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है.

केवीआईसी भ्रष्टाचार मामला क्या है?

भारत सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को, 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों को बंद कर दिया था. केवीआईसी ने 9 नवंबर, 2016 को एक परिपत्र जारी किया, जिसमें कहा गया था कि “1,000 रुपये और 500 रुपये मूल्यवर्ग के पुराने नोट किसी भी बिक्री आउटलेट और प्रतिष्ठानों द्वारा तत्काल प्रभाव नहीं स्वीकार नहीं किये जाएंगे. मगर, इसके बावजूद कुछ विमुद्रीकृत नोट खादी ग्रामोद्योग भवन (केजीबी), नई दिल्ली के खातों में विभिन्न तिथियों पर जमा किए गए थे.

मामले को तुरंत जांच और कार्रवाई के लिए केवीआईसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पास भेजा गया था. सीबीआई को सूचित किया गया था और इस जानकारी के आधार पर 6 अप्रैल, 2017 को एक संयुक्त औचक निरीक्षण किया गया. प्रारंभिक जांच के बाद, सीवीओ ने 17 अप्रैल, 2017 को केजीबी के चार अधिकारियों के निलंबन और स्थानांतरण की सिफारिश की. स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए चारों को तुरंत निलंबित कर दिया गया और उनका तबादला कर दिया गया.

22.17 लाख के रुपए किये गए थे जमा

सीवीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 10 नवंबर 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक दिल्ली में केजीबी के खाते में 22.17 लाख रुपये जमा किए गए, जिसमें 2,140 नोट 500 रुपये और 1,147 नोट 1,000 रुपये के थे. केवीआईसी ने 29 मई 2017 को सीबीआई को सीवीओ द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और चारों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में बताया.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने गहन जांच के बाद, केवल दो लोगों की संलिप्तता पाई. वे दोनों हेड कैशियर थे.  विमुद्रीकृत नोटों को जमा करने में दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. एजेंसी ने पाया कि केजीबी के खातों में पुराने नोटों के रूप में केवल 17.07 लाख रुपये जमा किए गए थे, जबकि सीवीओ ने बताया था कि 22.17 लाख रुपये थे. सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला कि 1,000 रुपये और 500 रुपये के मूल्यवर्ग में 22.17 लाख रुपये की कुल नकद जमा राशि में से 5.1 लाख रुपये कानूनी निविदा थी, जो कि 17.07 लाख रुपये की राशि थी. दोनों आरोपियों संजीव कुमार मलिक और प्रदीप यादव के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी और मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लंबित है.

 

Published at:31 Aug 2022 06:38 PM (IST)
Tags:News
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