पलामू (PALAMU) : हौसले बुलंद हो तो कुछ भी नामुकिन नहीं होता और यही कर दिखाया पलामू के एक छोटे से गांव कौवाखोह के दीपक ने. मुम्बई की एक बड़ी कंपनी में काम करने वाले दीपक ने अपने ससुर से प्रेरणा लेकर ड्रिप इर्रिगेशन की मदद से अपने गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की जिससे उसके दिन बदल गए. साथ ही गांव के 200 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिल गया है.
वैसे तो स्ट्रॉबेरी काफी नाजुक फल होता है. मिट्टी की गुणवत्ता अनुकूल रहने के कारण हरियाणा के अलावा झारखंड में कहीं और इसकी खेती नहीं होती. लेकिन दीपक और उनके दोस्तों की कड़ी मेहनत ने पलामू को नया गौरव दिया. कौवाखोह में उगाए गए स्ट्राबेरी के पौधे फिलहाल पुणे से लाया जाता है. जिसके कारण थोड़ी परेशानी होती है साथ ही NH 98 के मुख्य पथ के किनारे स्ट्रॉबेरी की खेती खेत मे की जा रही है. वह सड़क पर उड़ती धूल से भी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. पलामू का स्ट्रॉबेरी पलामू में ही पैक होकर बंगाल, पटना और रांची के बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है. जिससे किसानों को अच्छी आमदनी भी हो रही है. चार एकड़ से शुरू हुई स्ट्राबेरी की खेती आज 12 एकड़ में फैल चुकी है. स्ट्रॉबेरी का फल प्रति एकड़ 3-4 लाख का मुनाफा भी देता है. इसलिए जिला प्रशासन ने अगले साल इसे 30 एकड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है.
रिपोर्ट. अमित कुमार