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जानिए क्या है ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, जिसके लिए केंद्र ने 19,744 करोड़ रुपये की दी मंजूरी

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 1:57:19 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): पीएम मोदी के नेतृत्व में 4 जनवरी को कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में  राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी गई. इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए वैश्विक केंद्र बनाना है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए कुल 19,744 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, जिसमें से सरकार ने साइट कार्यक्रम के लिए 17,490 करोड़ रुपये, आगामी पायलट परियोजनाओं के लिए 1,466 करोड़ रुपये, अनुसंधान एवं विकास के लिए 400 करोड़ रुपये और अन्य मिशन घटकों के लिए 388 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल के फैसलों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दे दी है. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) इस मिशन के कार्यान्वयन के लिए योजना दिशानिर्देश तैयार करेगा.  

बता दें कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती और ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से 15 अगस्त, 2021 को राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन शुरू किया गया था. यह मिशन 2030 तक देश में लगभग 125 GW की संबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के साथ प्रति वर्ष कम से कम 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता के विकास को बढ़ावा देना चाहता है. इसमें 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 2030 तक 6 लाख से अधिक नौकरियों के सृजन की परिकल्पना की गई है. इसके परिणामस्वरूप 2030 तक जीवाश्म ईंधन के आयात में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की संचयी कमी और वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 MMT की कमी होगी.

ग्रीन हाइड्रोजन हब को किया जाएगा विकसित

मिशन उभरते अंतिम उपयोग क्षेत्रों और उत्पादन मार्गों में पायलट परियोजनाओं का भी समर्थन करेगा. मंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्पादन और हाइड्रोजन के उपयोग में मदद करने वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और उन्हें ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किया जाएगा. हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना का समर्थन करने के लिए एक नीतिगत ढांचा विकसित किया जाएगा. इसके साथ ही एक मजबूत मानक और विनियम ढांचा भी विकसित किया जाएगा.

इसके अलावा मिशन के तहत R&D (स्ट्रेटेजिक हाइड्रोजन इनोवेशन पार्टनरशिप - SHIP) के लिए एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी ढांचे की सुविधा प्रदान की जाएगी. केंद्र और राज्य सरकारों के सभी संबंधित मंत्रालय, विभाग, एजेंसियां और संस्थान मिशन के उद्देश्यों की सफल उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित और समन्वित कदम उठाएंगे. मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मिशन के समग्र समन्वय और कार्यान्वयन के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय जिम्मेदार होगा.

2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने का है उद्देश्य

भारत ने 2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने के उद्देश्य से हरित हाइड्रोजन उत्पन्न करना अभी शुरू ही किया है. मई 2022 में स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि भारत दुनिया भर में मौजूदा ऊर्जा संकट का लाभ उठाकर हरित हाइड्रोजन के नेता के रूप में उभरें. उनका यह दावा ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) द्वारा पूर्वी असम के जोरहाट में भारत का पहला 99.99% शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र शुरू करने के लगभग एक महीने बाद आया था.  

Tags:Green Hydrogen MissionCenter has approved Rs 19 744 croreWHAT IS GREEN HYDROGEN MISSIONNATIONAL GREEN HYDROGEN MISSIONPM NARENDRA MODIANURAG THAKURTHENEWSPOSTJHARKHAND NEWSNATIONAL NEWS

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