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सामाजिक न्याय के मसीहा-1: फुलवरिया के स्कूल से पटना यूनिवर्सिटी तक, जानिये लालू यादव का कैसा रहा सफ़र

BY -
Shahroz Quamar
Shahroz Quamar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 8:17:56 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): ‘गुदड़ी का लाल’ और 'गरीबों का मसीहा'  कहे गए लालू प्रसाद यादव आज जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. सामाजिक न्याय के मुखर स्वर सियासत की इस शख्सियत के राजनीतिक सफर पर चारा घोटाले ने भले ब्रेक लगा दिया, लेकिन बीच-बीच में उनके सार्वजनिक दख़ल ने अपनी भूमिका निभाई भी. एक गांव के बेहद गरीब घर से निकलकर सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले लालू के बारे में चलिये कुछ खास बातें आपको बताते हैं, झुग्गी-झोपड़ी और पगडंडियों से होकर बिहार के मुख्यमंत्री और रेल मंत्री की कहानी दिलचस्प है. पढ़िये पहला भाग:

पहले था नाम लालू प्रसाद चौधरी

‘गोपालगंज टू रायसीना : माई पॉलिटिकल जर्नी’ लालू की मशहूर किताब है. जिसमें उन्होंने जिंदगी के संघर्ष की कहानियां साझा की हैं. उनका जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज के फुलवरिया गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम कुंदन राय और माता का नाम मरछीया देवी है. उनका नाम लालू प्रसाद चौधरी था, जो स्कूल में जाकर लालू प्रसाद यादव हो गया. पुस्तक में लालू बताते हैं, एक बार जब मैं बहुत छोटा था तब मुझे हाथ से सिली गई बनियान मिली थी. लेकिन मैं न तो रोजाना नहा पाता था और न ही नए कपड़े को धो पाता था, क्योंकि मेरे पास बदलने के लिए कोई और बनियान ही नहीं थी. आगे बताते हैं, मुझे मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त था. मैं स्कूल के सारे पाठ बहुत जल्दी कंठस्थ कर जाता था.

घर की छत से टपकता था पानी

आगे वह लिखते हैं, मेरा जीवन बेहद मामूली ढंग से शुरू हुआ. मेरे आसपास सब कुछ इतना साधारण था कि उससे साधारण कुछ और हो ही नहीं सकता. उन्होंने बताया कि हम लगातार इसी भय में जीते थे कि हमारे सिर के ऊपर की छत कोई तूफान न उड़ा ले जाए या बरसात में उससे पानी न चूने लगे. एक बार जब मैंने अपनी मां से जोर देकर जानना चाहा कि आखिर मैं पैदा कब हुआ था तो मेरी मां नाराज हो गई. यह तब की बात है जब मैं हाईस्कूल में पढ़ रहा था. जब मैंने जिद की तो वह कुछ मायूस हो गई और बोलीं- हमरा नाइखे याद तू अन्हरिया में जनमला की अंजोरिया में.

14 साल की राबड़ी से 25 वर्ष के लालू का हुआ था ब्याह

गांव से निकलकर लालू पटना चले आए. यहां उनके बड़े भाई वेटरनरी विभाग में चतुर्थ कर्मी थे. पटना में पढ़ाई के दौरान ही उनके रिश्ते आने लगे. शादी के लिए लालू यादव ने 5 सेट सोना-चांदी का गहना खरीदा. लालू यादव के तिलक में 3000 रुपए चढ़ाए गए थे. राबड़ी देवी से लालू यादव की शादी हो गई. यह एक जून 1973 की तारीख थी. तब लालू 25 साल तो राबड़ी 14 साल की थीं.  लालू परिवार के साथ वेटरनरी क्वार्टर में रहने लगे. कहते हैं कि घर में टॉयलेट भी नहीं था. बीएन कॉलेज में एडमिशन लिया. बनना वह डॉक्टर चाहते थे, लेकिन ऑपरेशन करने से डरते थे. आखिर राजनीति शास्त्र और इतिहास से 1970 में ग्रेजुएशन किया. इन दिनों सियासत में खूब सक्रिय रहनं लगे. किताब में बतरते हैं, - मेरी आवाज में दहाड़ थी. वो पटना यूनिर्सिटी की स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बन गए. इसके बाद वो बिहार वेटरनरी कॉलेज में डेली वेज पर चपरासी बन गए. पढ़ना रुका नहीं। पटना यूनिवर्सिटी में ले दाखिला लिया और एलएलबी करने लगे.

 

 

 

Tags:News

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