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रामनवमी विशेष : झारखंड का “राम कनेक्शन” बैठे-बिठाए भाजपा की झोली में बरसाता है “राम कृपा”, इन इलाकों में “जय श्री राम” के नाम पर पड़ते हैं वोट

BY -
Rajesh Tomar
Rajesh Tomar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 27, 2026, 7:19:42 PM

झारखंड के राजनीति में “राम कनेक्शन” केवल एक भावनात्मक या सांस्कृतिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक ठोस चुनावी फैक्टर के रूप में देखा जाता है ये कनेक्शन. राज्य के प्रमुख शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे जमशेदपुर, धनबाद, रांची और बोकारो जैसे जिलों में पिछले दो दशकों के चुनावी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहां वोटिंग पैटर्न में धार्मिक पहचान और राजनीतिक विचारधारा का गहरा संबंध रहा है. 

चुनावी आंकड़ों में “राम कनेक्शन” की झलक

साल 2000 में झारखंड के गठन के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनावों (2000, 2005, 2009, 2014, 2019) और हालिया राजनीतिक रुझानों (2024 तक) का विश्लेषण करें, तो इन क्षेत्रों की 10–12 प्रमुख सीटों पर का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है.

उदाहरण के तौर पर:

  • रांची, हटिया, कांके, खिजरी: इन सीटों पर भाजपा ने 2000 के बाद से अधिकतर चुनावों में जीत दर्ज की या मजबूत उपस्थिति बनाए रखी.
  • हजारीबाग और बड़कागांव बेल्ट: हजारीबाग सीट भाजपा का पारंपरिक गढ़ रही है, जहां पार्टी को बार-बार सफलता मिली.
  • धनबाद, बाघमारा, बोकारो: कोयलांचल क्षेत्र में मजदूर और मध्यम वर्ग के बीच भाजपा का वोट बैंक स्थिर रहा है.
  • पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम (जमशेदपुर क्षेत्र): यहां शहरी और औद्योगिक मतदाताओं के बीच भाजपा को लगातार समर्थन मिलता रहा है, खासकर जमशेदपुर पूर्वी सीट लंबे समय तक पार्टी के प्रभाव में रही.

यदि मोटे तौर पर आंकड़ों को समेटें, तो इन 10–12 सीटों में भाजपा ने 2000 से 2024 के बीच लगभग 60–70% चुनावों में जीत या प्रमुख प्रतिस्पर्धा बनाए रखी है.

उम्मीदवार नहीं, विचारधारा पर वोट

इन क्षेत्रों की एक खास विशेषता यह है कि यहां कई बार चुनाव “उम्मीदवार बनाम उम्मीदवार” नहीं, बल्कि “विचारधारा बनाम विचारधारा” बन जाता है. “जय श्री राम” का नारा यहां राजनीतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है.

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन इलाकों में मतदाता अक्सर यह मानकर वोट करते हैं कि वे किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं. यही कारण है कि कई बार अपेक्षाकृत कम चर्चित उम्मीदवार भी सिर्फ पार्टी के नाम पर जीत हासिल कर लेते हैं.

आरएसएस और सांस्कृतिक आधार

इस पूरे समीकरण में की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. आरएसएस ने दशकों से झारखंड के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शाखाओं, सामाजिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया है.

रामनवमी, हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़े स्तर पर जुलूस और कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें स्थानीय समाज की व्यापक भागीदारी होती है. यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और पहचान का भी माध्यम बनते हैं.

आस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

झारखंड के इन क्षेत्रों में भगवान राम और हनुमान के प्रति आस्था कोई नई बात नहीं है. यह परंपरा सैकड़ों वर्षों पुरानी है, जो स्थानीय मंदिरों, अखाड़ों और लोक परंपराओं में दिखाई देती है.

रांची और हजारीबाग जैसे शहरों में रामनवमी के जुलूस ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहे हैं. इन आयोजनों में हजारों लोग शामिल होते हैं और यह आयोजन समय के साथ और भी भव्य होते गए हैं. यही सांस्कृतिक पृष्ठभूमि चुनावी समय में राजनीतिक समर्थन में तब्दील हो जाती है.

क्या सिर्फ धर्म ही फैक्टर है?

हालांकि “राम कनेक्शन” को एक मजबूत फैक्टर माना जाता है, लेकिन यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि केवल धार्मिक भावनाएं ही चुनावी नतीजों को तय करती हैं. विकास, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार और स्थानीय मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं.

लेकिन इन इलाकों में खास बात यह है कि जब विकास और धर्म के मुद्दे साथ आते हैं, तो भाजपा को इसका दोहरा लाभ मिलता है. पार्टी अपनी छवि को एक तरफ विकास के एजेंडे के साथ जोड़ती है, वहीं दूसरी तरफ सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी मजबूत करती है.

"जय श्री राम":कनेक्शन X फैक्टर तो है 

झारखंड में “राम कनेक्शन” राजनीति और धर्म के मेल का एक स्पष्ट उदाहरण है. ने इस भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक स्थायी वोट बैंक में बदलने में सफलता हासिल की है, जबकि का जमीनी नेटवर्क इसे मजबूती देता है.

आने वाले चुनावों में भी यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ट्रेंड बरकरार रहता है या विपक्ष विकास और सामाजिक मुद्दों के आधार पर इस समीकरण को बदलने में सफल होता है. फिलहाल इतना तय है कि झारखंड की राजनीति में “राम” केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली चुनावी कारक बन चुके हैं.

Tags:Jharkhand Ram ConnectionBJP vote bank JharkhandRam factor in Jharkhand politicsJai Shri Ram voting trendWhy BJP wins in Ranchi and Jamshedpur

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