TNP DESK- बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार के गठन के बाद लालू प्रसाद परिवार पर हमले तेज हो गए हैं .तो दूसरी ओर राजद भी एनडीए के नेताओं को घेरने की कोशिश शुरू कर दिया है.
बिहार में अभी बंगले की राजनीति शुरू हुई है. राबड़ी देवी के सरकारी बंगले में तहखाना की बात उठने के बाद अब राजद भी सवाल खड़े कर रहा है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बिहार में अभी बंगले की राजनीति खूब चल रही है.
जानकारी के अनुसार राजद के प्रवक्ता प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर पूछा है कि किस नियम और किस वजह से जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पटना में सरकारी आवास में अभी भी रह रहे हैं. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के संबंध में भी पूछा गया है. कहा गया है कि जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी को सेंट्रल पुल का बंगला आवंटित है. जबकि मात्र वह एक विधायक हैं.
प्रश्न किया गया है कि क्या वरीयता के मामले में यह उचित है. राजद ने पूछा है कि संजय झा और देवेश ठाकुर को मंत्री और विधान परिषद के सभापति के नाते पटना में सेंट्रल पुल का बंगला आवंटित हुआ था. अब दोनों उस हैसियत में नहीं है. राजद ने सवाल किया है कि क्या उनके बंगले में कोई तहखाना तो नहीं है. जिसे छुपाने की मंशा से वह बंगला नहीं खाली कर रहे हैं.
बता दे कि जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने राबड़ी देवी के सरकारी बंगले में तहखाना की आशंका प्रकट किया था. यह बंगला पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से राबड़ी देवी को आवंटित हुआ था. जिन्हें अब यह छोड़ने का नोटिस दिया जा चुका है. बंगला खाली करने का समय बीत चुका है, फिर भी बंगला खाली नहीं हो रहा है. मतलब साफ है कि बिहार की राजनीति में अब बंगला की राजनीति की घुसपैठ हो गई है.
आरोप प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद सहित महागठबंधन का सुपड़ा लगभग साफ हो गया है. राजद की राजनीतिक हैसियत कमजोर पड़ गई है .एनडीए प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटा है .ऐसी स्थिति में बिहार में तरह-तरह की राजनीति शुरू हुई है. जदयू लालू प्रसाद पर हमले तेज कर दिया है तो राजद भी अब बंगले की राजनीति को इस मोड़ पर ले जाना चाह रहा है ,जहां जदयू को भी सफाई देनी पड़े. देखना है इन मामलों में आगे आगे होता है क्या?
रिपोर्ट धनबाद ब्यूरो
