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बिहार के मुख्यमंत्री इधर हैं या उधर? भाजपा ने कहा कि राजनीतिक बोझ बन गये हैं नीतीश कुमार

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 11, 2026, 11:09:34 AM

टीएनपी डेस्क(Tnp desk):-सियासत में कभी इधर तो कभी उधर करने वाले नीतीश कुमार के मन में क्या चलते रहता है. उनसे बेहतर कोई नहीं जनता है, राजनीति में करवटें बदलना और अपनी बात को मन ही मन दबाकर रखना उनका शगल सा रहा है. कब उनका क्या अगला कदम होगा ये कोई नहीं जानता . लेकिन, एक बात का तो आभास जरुर होता है कि उनकी ख्वाहिश हमेशा राजनीति में ऊंची ही रहती है. बिहार में लालू राज के बाद अगर किसी ने सत्ता का मुखिया यानि मुख्यमंत्री बना तो वो नीतीश कुमार ही रहे. चाहे उनके दल का गठबंधन बीजेपी के साथ हो या फिर आरजेडी के साथ. मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही रहते हैं. अभी भाजपा को चुनौती देने के लिए I.N.D.I.A का गठबंधन बना, जिसकी अगुवाई नीतीश ने ही बढ़चढ़कर की . सबसे पहले उन्होंने ही केन्द्र से भाजपा के सफाये के लिए विपक्ष को एकजुट करने का बिगुल फूंका. लेकिन, अब चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, इसे लेकर I.N.D.I.A  भी हुंकार भरने की पूरी तैयारी में हैं. लेकिन, इसकी बुनियाद गढ़ने वाले नीतीश मानों एकबार फिर पाला बदलने वाले हैं. उनके एनडीए से जुडने की चर्चा काफी तेज हो गयी है. इसके पीछे उनकी हाल के दिनो का रैवेया इशारा कर रहा है.

हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल की तरफ से पूर्व उपप्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल की जयंती के मौके पर हरियाणा में एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया था . इसे लेकर नीतीश कुमार को बहुत पहले ही आमंत्रण भी मिला था. लेकिन, विपक्ष की इस बड़ी रैली में जाने की बजाए पटना में जनसंघ के संस्थापकों में एक दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचकर सभी को चौका दिया. इससे एकबार फिर कयास , चर्चा औऱ सुगबुगाहट तेज हो गई.

एनडीए में जाने से नीतीश का इंकार

भाजपा के इस कार्यक्रम के दौरान नतीश से पत्रकारों से पूछा तो उन्होंने एनडीए में जाने की अटकलो को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने इस तरह की बातों को फिजूल औऱ फालतू करार दिया और विपक्ष को एकजुट करने की बात कही. नीतीश के इंकार से तो जवाब बेशक मिल गया. लेकिन, बीजेपी पर आगबबूला जैसा तेवर रखने वाले नीतीश की जुबान में उतनी तल्खियां भाजपा के खिलाफ तो नहीं दिख रही है. संसद में बीजेपी नेता बिदुड़ी के नफरती बोल पर भी नीतीश ने ये कहते हुए टाल गये कि कौन क्या बोलता है, इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है. वे सभी के सम्मान में काम करते हैं.

नीतीश के लिए भाजपा के दरवाजे बंद

पटना में भाजपा नेताओं की तरफ से आयोजित पंडीत दीनदयाल उपाध्याय के कार्यक्रम में नीतीश की मौजूदगी पर चर्चाए तो काफी तेज हुई है. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने नीतीश पर सख्त रैवेया अपनाते हुए बोला कि , गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार नहीं दो-दो बार साफ कर दिया है कि भाजपा में उनके लिए दरवाजे बंद है. सुशील मोदी इतने से ही नहीं रुके , उन्होंने नीतीश पर करारा प्रहार करते हुए कह डाला कि आखिर उनके पास बचा ही अब क्या है. उनमे दो वोट ट्रांसफर करने की ताकत नहीं बची है. अगर उनकी इतनी राजनीतिक क्षमता होती तो 2020 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 20 पर ही नहीं सिमट जाते. उन्होंने नीतीश कुमार को राजनीतिक बोझ तक बता डाला. 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव अकले जीतने का दम भी भाजपा नेता सुशील मोदी ने भरा .

अभी लोकसभा चुनाव के वक्त अहिस्ते-अहिस्ते नजदीक आ रहा है. लिहाजा, सियासत की कई कालाबाजियां देखने को मिलेगी. इंडिया और एनडीए की जंग में कौन इधर है औऱ कौन उधर होगा ये भी पता चल जायेगा. क्योंकि ये तो सभी को मालूम है कि टिकट बंटवारे के वाक्त ही आमूमन ये पता लगता है कि कौन किसके साथ है औऱ कौन किसके साथ नहीं हैं. नीतीश कुमार एक मकसद से ही एनडीए को छोड़कर आऱजेडी के साथ मिले. इससे वे मुख्यमंत्री तो बनें ही रहे. लेकिन, भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की पहल शुरु कर, उनके बड़े अऱमान ही दर्शाते हैं. क्योंकि कहा जाता है कि बिना मकसद के कोई भी कदम नीतीश कुमार नहीं उठाते है. अब देखना है कि आगे क्या होता, क्योंकि भाजपा ने तो उनके लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं.

 

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