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3  मार्च को लेकर दुल्हन की तरह सजाई जा रही है लौहनगरी, जमशेदपुर के लिए क्यों खास है ये दिन,जानें इसका गौरवशाली इतिहास

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 6:07:29 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): जमशेदपुर में 3 मार्च का दिन बड़ा ही खास होता है, और ये दिन जमशेदपुरियों के लिए ऐतिहासिक और उत्सव भरा बन चुका है. यह न केवल जमशेदपुर वासियों के लिए एक महत्वपूर्ण तारीख है, बल्कि इस दिन के पीछे एक गहरी और एतिहासिक कहानी भी छिपी हुई है. आइए जानते हैं कि इस दिन को क्यों मनाया जाता है और जमशेदपुर में इसे लेकर किस तरह का उत्साह रहता है.

3 मार्च क्यों है खास

3 मार्च, जमशेदपुर के लिए एक खास दिन है, क्योंकि इसे 'जमशेदपुर दिवस' के रूप में मनाया जाता है.यह दिन टाटा स्टील के फाउंडर जमशेदजी नौसीरवानजी टाटा की जयंती से जुड़ा हुआ है.जिन्होने जमशेदपुर को एक औद्योगिक हब और भारतीय उद्योग का शहर बना दिया. इस दिन जमशेदजी नौसीरवानजी टाटा का जन्मदिन होता है, जिसको पूरे भव्य तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है.

जुबली पार्क रहता है आकर्षण का केंद्र

3 मार्च के दिन वैसे तो पूरे शहर को सजाया और संवारा जाता है, लेकिन जमशेदपुर के साकची में स्थित प्रसिद्ध जुबली पार्क को बड़े ही खास तरीके से सजाया जाता है, जो लोगों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहता है.लोग इससे देखने आते है तो बस टुक टुक निहारते ही रहे जाते है. जुबली पार्क को रंग बिरंगी लाइट से सजाया जाता है. वहीं  फुव्वारे को भी काफी खूबसूरत तरीके से सजाया जाता है. बता दे कि यह मेला 3–4 दिनों के लिए लगता है. लोग इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में आते है.मेले में न केवल शहर के लोग बल्कि दूसरे राज्यों पहुंचते है.पार्क को करीब 15 दिन पहले से ही सजाने का काम शुरू कर दिया जाता है. बात करे सजावट की तो एंट्रेंस गेट से लेकर पूरा पार्क रोशनी से जगमगा उठता है.

जमशेदपुर के विकास में टाटा का  है अहम योगदान

जमशेदपुर का इतिहास भारतीय उद्योग के सबसे महान पन्नों में से एक है. टाटा परिवार और विशेष रूप से जेएन टाटा का इस शहर के विकास में योगदान काफी महत्वपूर्ण है. उन्होंने न केवल एक औद्योगिक शहर की नींव रखी, बल्कि वह शहर को सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक आदर्श बनाने की दिशा में कार्य  करते रहे है.

पूरे शहर में रहता है जश्न और उत्साह का माहौल

3 मार्च के दिन जमशेदपुर में हर तरफ उत्सव का माहौल रहता है. मानो तो एक त्यौहार सा है. जमशेदपुर के लिए 3 मार्च से लेकर कई दिनों तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. संगीत, नृत्य, और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से शहरवासी इस दिन की महत्ता को समझाते हैं.स्कूलों और कॉलेजों में भी अलग अलग तरीके के कार्यक्रम आयोजित की जाती हैं, जहां बच्चे और युवा अपनी कला और कौशल का प्रदर्शन करते हैं. सड़कों पर रैलियां, प्रदर्शनी, और सामूहिक आयोजन किए जाते हैं, जहां शहर के लोग एकजुट होकर इस ऐतिहासिक दिन को मनाते हैं.

कैसे शुरू हुआ 3 मार्च का त्यौहार?

3 मार्च को जमशेदपुर में मनाने की परंपरा काफी पहले शुरू हो चुकी थी. शुरू में यह एक साधारण कार्यक्रम हुआ करता था, लेकिन समय के साथ यह एक बड़े लेवल पर सेलिब्रेट किया जाने लगा. टाटा परिवार के योगदान और शहर की ऐतिहासिक धरोहर को सम्मानित करने के लिए हर साल इस दिन को और भी बेहतर तरीके से मनाया जाता है.अभी के समय में, 3 मार्च जमशेदपुर के लिए एक पर्व की तरह बन गया है. लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं. शहर के अलग-अलग हिस्सों को इलेक्ट्रिक लाईट से दुल्हन की तरह सजाया जाता है.इस दौरान काफी आकर्षक सजावट, स्ट्रीट फूड, और लाइव म्यूजिक के कार्यक्रम होते हैं, जिसका शहरवासियों लुफ्त उठाते है.

3 मार्च जमशेदपुरवासियों के लिए गर्व की बात

जमशेदपुर में 3 मार्च का दिन सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह शहरवासियों की एकता, प्रेम और गर्व का प्रतीक भी है. यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि जमशेदपुर का निर्माण केवल एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नहीं हुआ, बल्कि यह एक जीवित शहर है, जो अपने इतिहास, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए जाना जाता है. 3 मार्च का उत्सव हर साल शहरवासियों को जोड़ता है और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है.

रिपोर्ट-प्रिया झा

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