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बिहार के सीएम को इलाज का ऑफर देने वाले इरफान अंसारी का स्वास्थ्य विभाग खुद ही है बीमार, कभी खाट तो कभी 20 रुपये के झोले में दिखता है शव

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 6:59:44 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : हिजाब विवाद पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार को इलाज का ऑफर देने वाले इरफान अंसारी का स्वास्थ्य विभाग खुद ही बीमार है. लेकिन मंत्री जी को शायद इसकी भनक नहीं. आए दिन झारखंड से दिल झकझोरने वाली घटना सामने आती है. कभी मरीज इलाज के अभाव में खाट पर दम तोड़ते नजर आते है तो कभी रिम्स अस्पताल के भीतर जमीन पर. अब ताजा मामला झारखंड के चाईबासा जिले से सामने आयी है, जहां एंबुलेस या फिर शव वाहन नहीं मिलने के कारण एक पिता अपने चार साल के बच्चे का शव झोले में लेकर अस्पताल से निकल गया. नोआमुंडी ब्लॉक के बलजोरी गांव के एक गरीब आदिवासी पिता डिंबा चटोम्बा को अपने चार साल के मासूम बेटे की मौत के बाद एम्बुलेंस तक नहीं मिली. इस घटना ने पूरे सिस्टम को बेनकाब कर दिया है. किसी भी मुद्दे पर खुल कर अपनी राय रखने वाले सुबे से स्वास्थ्य मंत्री ने चुप्पी साध रखी है.

झारखंड में एक नारा खूब दोहराया जाता है कि हेमंत हैं तो हिम्मत है”, लेकिन जमीनी हकीकत इस नारे को कठघरे में खड़ा कर रही है. झारखंड की अबुआ सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई नजर आ रही है. जहां जरूरतमंदों को इंसानियत के आधार पर भी सुविधा मिलना मुश्किल हो गया है.

दो दिन पहले, डिंबा ने अपने बीमार बच्चे को इलाज के लिए चाईबासा सदर अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन शुक्रवार को इलाज के दौरान मासूम बच्चे की मौत हो गई. बच्चे की मौत के बाद सबसे बड़ी चुनौती बच्चे के शव को घर ले जाना था. डिंबा ने अस्पताल मैनेजमेंट से बार-बार एम्बुलेंस के लिए गुहार लगाई. उसने घंटों इंतज़ार किया, लेकिन न तो सिस्टम पिघला और न ही कोई ज़िम्मेदार व्यक्ति आगे आया.

नहीं दी गई एम्बुलेंस, पिता शव को झोले में डालकर गांव ले गया शव

आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के कारण, डिंबा के पास न तो पैसा था, न रसूख और न ही कोई जान-पहचान. आखिरकार, हताश होकर उसने अपने चार साल के बच्चे के शव को एक बैग में रखा और अस्पताल से नोवामुंडी के बलजोरी गांव तक पैदल चलकर गया. यह दृश्य सिर्फ एक पिता का दर्द नहीं है, बल्कि सरकार के स्वास्थ्य सिस्टम पर एक करारा तमाचा है. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज और सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

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