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बिहार में चलती ट्रेन में जीआरपी जवानों ने लूटा 1.44 करोड़ का सोना, थानेदार ही निकला मास्टरमाइंड! अब गिरी गाज, 4 सस्पेंड

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 5:18:15 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : चलती ट्रेन में करोड़ों की सोने की लूट ने बिहार पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. 21 नवंबर को हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में हुई 1.44 करोड़ रुपये की गोल्ड लूट के मामले में गया जीआरपी थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी संलिप्तता सामने आने के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई.

जांच के नाम पर की गई लूट

आरोप है कि जांच के बहाने गया जीआरपी के चार जवानों और दो सिविलियन ने एक कोरियर युवक को घेर लिया. कोलकाता से कानपुर सोना ले जा रहे धनंजय शाश्वत से करीब एक किलो सोने के तीन बिस्कुट छीन लिए गए. इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई और उसे चलती ट्रेन से उतार दिया गया. लूट के बाद आरोपी फरार हो गए और युवक को खाली हाथ छोड़ दिया गया.

तकनीकी साक्ष्यों से खुली SHO की भूमिका

जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की गई. इसमें गया जीआरपी के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई. इसके बाद उन्हें पटना बुलाकर करीब आठ घंटे तक पूछताछ हुई. पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी कर रेल न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

चार जीआरपी जवान निलंबित

लूटकांड में नामजद चार जीआरपी जवान-सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन—को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. वहीं, दो सिविलियन अभियुक्त परवेज आलम और रेल थाना के पूर्व चालक सीताराम की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है.

DGP की निगरानी में SIT जांच

मामले में गया रेल थाना में कांड संख्या 334/25 दर्ज की गई है. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं. पुलिस मुख्यालय ने इस केस को बेहद गंभीरता से लिया है. सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी खुद जांच की निगरानी कर रहे हैं. वहीं, जांच की कमान रेल एसपी गया संभाल रहे हैं, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे बढ़े.

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