रांची(RANCHI): नक्सलवाद अब अंतिम दौर में है.गृह मंत्रालय ने 31 मार्च 2026 नक्सलियों के खात्मे की अंतिम तारीख रखी है. इस टारगेट को तय करने के लिए सुरक्षा बल के जवानों की एक बड़ी टीम जंगल में अभियान में लगी है. जिसमें कई कामयाबी भी मिली. खास कर 2025 बेहद बड़ा साल नक्सल अभियान के लिए रहा. इस साल एक दर्जन सेंट्रल कमिटी सदस्य का खात्मा हुआ. इसमें झारखंड से छत्तीसगढ़ और ओडिसा तेलंगाना कमिटी के सदस्य शामिल है.अब महज कुछ ही केन्द्रीय कमिटी के बड़े नक्सली बचे है. जिनकी तलाश जवान कर रहे है.
सबसे पहले बात झारखंड की करें तो झारखंड के कई ऐसे इलाके थे जहां नक्सलियों का कैम्प हुआ करता था. उस इलाके में नक्सली अपनी व्यवस्था चलाते थे. लेकिन साल 2025 में बड़ा अभियान शुरू हुआ जिसमें बड़े ओहदे वाले नक्सलियों का खात्मा हुआ. प्रयाग मांझी (Prayag Manjhi) झारखंड के बोकारो के लालपनिया इलाके में लुलु पहाड़ियों में सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया. इसके साथ इसके दस्ते के गए 8 और नक्सली भी ढ़ेर हुए. प्रयाग मांझी के अंत के साथ बोकारो में नक्सलियों का खात्मा हो गया.
इसके बाद एक और बड़े नक्सली का encounter हजारीबाग में हुआ. सेंट्रल कमिटी सदस्य सहदेव सोरेन के मारे जाने की खबर सामने आई. यह दिन 15 सितंबर का था जब सूर्य की किरण हल्की निकल रही थी उसी समय गिरहोर के जंगल में सुरक्षा बल के जवानों से नक्सली सहदेव का सामना हो गया. नक्सलियों ने जवानों को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी. जवानों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की जिसमें एक करोड़ के इनामी नक्सली को उसके साथियों के साथ ढेर कर दिया. यह दूसरा इस साल का बड़ा एनकाउंटर था जिसमें जवानों ने सेंट्रल कमिटी सदस्य को मार गिराया.
दोनों सीपीआई माओ में एक बड़ा कद रखते थे. माना जाता था की हजारीबाग और बोकारो इलाके में नक्सलवाद को बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने के लिए दोनों सक्रिय थे. लेकिन सुरक्षा बल के जवानों की साहस और खुफिया विभाग की इनपुट ने सही समय पर दोनों को ढ़ेर कर दिया. जिसमें दो कुख्यात का अंत जंगल में हो गया. दोनों पर एक एक करोड़ के इनाम था. इससे ही इनके आतंक का अंदाजा लगाया जा सकता है.
इसके अलावा नक्सलवाद की आग में सबसे ज्यादा जलने वाला राज्य छत्तीसगढ़ में भी साल 2025 में बड़े नक्सलियों का खात्मा हुआ. माड़वी हिडमा से लेकर बसवा राजू को जवानों ने इसी साल खत्म कर दिया. साथ ही ऐसे आधा दर्जन बड़े कैडर वाले नक्सली है. जिन्हे सुरक्षा बल के जवान कई दशक से जंगल में खोज रहे थे. लेकिन हर बार घने जंगल का फायदा उठा कर भागने में सफल होते थे. लेकिन जब केंद्र सरकार ने डेड लाइन तय की उसके बाद फिर एक एक कर बड़े नक्सली मारे गए.
सबसे पहले बात इस साल के सबसे चर्चित और बड़े मुठभेड़ की करेंगे. जिसमें माड़वी हिडमा मारा गया. हिडमा देश का सबसे बड़ा नक्सली नेता था शातिर दिमाग और रणनीति बनाने में माहिर माड़वी हमेशा जवानों से बच निकल जाता था. लेकिन जब मारेडुमुली जंगल में ग्रेहॉन्ट के जवानों ने हिडमा का अंत कर दिया. यह खबर देश में सबसे सुर्खियों में रही. जब नक्सलियों को सबसे बड़ी चोट जवानों ने पहुंचायी थी.
इसके बाद करेगुट्टा पहाड़ी पर चले अभियान में जवानों ने सेंट्रल कमिटी सदस्य बसवा राजू को मार गिराया.माना जाता था की यह हिडमा का भी गुरु था. इसका नेटवर्क छत्तीसगढ़ से लेकर तेलंगाना ओडिसा और महाराष्ट्र तक फैला था. लेकिन जवानों ने सबसे बड़े ऑपरेशन में इसे भी ढ़ेर कर दिया.
इसके बाद चलपती जो सेंट्रल कमिटी सदस्य था इसे भी जवानों ने मार गिराया. इसके साथ भास्कर, गणेश उइके (सेंट्रल कमेटी मेंबर), कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कादरी सत्यनारायण रेड्डी,सुधाकर कई ऐसे नाम है जो माओवादी की लौ को जला कर चल रहे थे उसे जवानों ने जंगल में ही जमीनडोज कर दिया.
अब छत्तीसगढ़ और झारखंड में जिस तरह से जवानों की आक्रामक कार्रवाई दिखी. इसका प्रभाव भी नक्सल गतिविधि पर दिखा है. बस्तर रेंज में पुलिस रिकार्ड के मुताबिक महज 100 के करीब ही नक्सलियों का दस्ता बचा है वहीं झारखंड में पुलिस मुख्यालय के रिपोर्ट में सारंडा का जंगल ही एक मात्र ठिकाना नक्सलियों का है. जहां 60 से 65 नक्सली अभी भी हथियार लेकर घूम रहे है. जिनका भी खात्मा जल्द होने का दावा किया है.
अब पूरे अभियान को देखे तो केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 नक्सलवाद के खात्मे की अंतिम तारीख रखी है और दावा किया है कि नक्सलवाद का नाम लेने वाला भी किसी राज्य में नहीं बचेगा. इसके साथ छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद अब खात्मे की ओर है. महज चार से पाँच सेंट्रल कमिटी सदस्य बचे है. जिन्हे भी अपील किया की आत्म समर्पण करें नहीं तो जंगल में अन्य नक्सलियों जैसा हाल हो जाएगा.
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