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झारखंड में पूरे साल चलता रहा सियासी दांवपेंच, राजभवन के लिफाफे से लेकर ईडी की पूछताछ और कैश कांड का मामला सुर्खियों में रहा

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 1:08:10 AM

रांची(RANCHI): साल 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ. राज्य के गठन के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता राज्यवासियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा रहा. प्रदेश में पहली बार रघुवर दास की सरकार ने साल 2014 से 2019 में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. हालांकि, 2019 विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी. सरकार ने बीते 29 दिसंबर 2022 को ही अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे किए हैं. वहीं हम आपको इस स्टोरी में साल 2022 में राजनीति से जुड़ी कुछ अहम खबरें बताने वाले हैं, जो पूरे साल भर राज्य की जनता के लिए और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा. राजभवन के लिफाफे से लेकर, विधायक कैश कांड और विधायकों के यहां ईडी की छापेमारी से पूरे साल भर लोगों की टीवी स्क्रीन भरे रहे. ऐसे में आज हम आपको एक बार साल 2022 की राजनीति से जुड़ी अहम खबरों को बतांने जा रहे हैं.

2022 की शुरुआत में कोरोना रहा मुद्दा

साल 2022 के शुरुआती महीने तक कोरोना महामारी की हड़कंप थी. सभी राजनेता साल के पहले महीने में कोरोना महामारी पर काम कर रहे थे. सरकार लोगों को बचाने में लगी हुई थी. सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्र में थे. ऐसे में साल का पहला और दूसरा महीना कोरोना महामारी रोकथाम में खत्म हो गया.

विधायक कैश कांड मामला

झारखंड के लिए विधायक कैश कांड मामला अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है. फिलहाल ही इस मामले में बेरमो विधायक अनूप सिंह से ईडी ने पूछताछ की है. ऐसे में यह मामला साल 2023 में भी चलेगा. बता दें कि यह मामला 30 जुलाई 2022 की है. पश्चिम बंगाल के हावड़ा में झारखंड के तीन विधायक डॉ इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोंगाड़ी को गिरफ्तार कर लिया गया था. बता दें कि तीनों विधायकों को कोलकाता पुलिस ने 49 लाख कैश के साथ गिरफ्तार किया था. बाद में मामले की जांच कोलकाता सीआईडी को ट्रांसफर कर दी गई थी. पकड़े गए विधायकों पर आरोप था कि वो झारखंड की वर्तमान हेमंत सरकार को पैसे लेकर गिराना चाहते थे. जिसके बाद बेरमो विधायक अनूप जयमंगल सिंह ने अरगोड़ा थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराया था. एफआईआर में अनूप सिंह ने बताया था कि पकड़े गए तीनों विधायकों ने उन्हें हेमंत सरकार को गिराने के एवज में मंत्रीपद और 10 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था. अभी भी ये केस जारी है और ईडी तीनों विधायकों को पूछताछ के जल्द ही बुला सकती है.   

अगस्त से शुरू हुआ लिफाफे का खेल

बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पद में रहते हुए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट ( Office Off Profit ) लेने का मामला है. दरअसल, सीएम पर आरोप है कि हेमंत सोरेन खनन मंत्री रहते हुए अनगड़ा लीज माइंस अपने नाम लिए थे. इसके खिलाफ रघुवर दास ने राजभवन को पत्र लिखकर हेमंत सोरेन को पद से बर्खास्त करने की मांग की थी. जिसके बाद राज्यपाल रमेश बैस ने इसकी अनुशंसा चुनाव आयोग को भेज दी थी. जिसके बाद चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को लिफाफा राजभवन भेजा, जिसके बाद से सीएम सदस्यता जाने की बातें सामने आनी लगी. जिसके बाद से हेमंत सोरेन की सरकार में टूट की खबरे से लेकर राजभवन से सरकार की खटास की बातें सामने आने लगी. हालांकि, अभी तक पत्र खोला नहीं गया है ऐसे में साल 2023 के लिए लिफाफा और राजभवन भी सबसे बड़ा मुद्दा रहने की उम्मीद है.

ईडी और सीबीआई की रेड

राज्य में ईडी और सीबीआई का मुद्दा भी बड़ा रहा. अभी भी ईडी और सीबीआई की कार्रवाई राज्य में लगातार जारी है. ईडी राज्य के राजनेताओं से लेकर बड़े-बड़े कारोबारियों तक के यहां छापेमारी कर रही है. साल 2022 के मध्य से ही झारखंड में ईडी और सीबीआई एक्टिव है. वहीं, ये कार्रवाई 2023 में भी जारी रहने की उम्मीद है.

पूजा सिंघल से लेकर पंकज मिश्रा और प्रेम प्रकाश भी रहा मुद्दा

झारखंड में 2022 में पूजा सिंघल की गिरफ्तारी से लेकर पंकज मिश्रा तक का मुद्दा भी काफी चर्चा में रहा. पूजा सिंघल पर मनरेगा घोटाला का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में आंच उनके पति अभिषेक झा तक पहुंचा. बाद में ईडी ने पति अभिषेक के पल्स अस्पताल के अटैच कर लिया. वहीं, पंकज मिश्रा जो हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि हैं उनपर आरोप है कि वो अवैध खनन और माइनिंग में बड़े प्लेयर हैं. वहीं, प्रेम प्रकाश के यहां से दो-दो AK-47 निकलने के बाद कई सवाल खड़े हुए थे. हालांकि, साल 2022 में कई राजनीतिक उठापटक हुए जिसका जिक्र आगे की स्टोरी में करेंगे.  

                        

 

 

   

                   

                  

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