✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. Trending

देवघर स्थित पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ का नाम भैरव के पर कैसे पड़ा, जानिए क्या कहते हैं जानकार

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 2:28:40 AM

देवघर (DEOGHAR):  देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम की गिनती देश के पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की जाती है. शास्त्रों में भी बैद्यनाथधाम की महिमा का विषद उल्लेख किया गया है. मान्यता है कि सतयुग में ही इसका नामकरण हो गया था. यहाँ स्थित पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग के रूप में भी जाना जाता है. यहां शिव और शक्ति दोनों विराजमान हैं. शास्त्रों के अनुसार यहां माता सती के हृदय और भगवान शिव के आत्मलिंग दोनों का समिश्रण है,यही कारण है कि यहां स्थित ज्योतिर्लिंग की महिमा का पुराणों में भी गुणगान किया गया है.

शिवपुराण के शक्ति खंड में इस बात का उल्लेख है कि माता सती के शरीर के 52 खंडों की रक्षा के लिए खुद भगवान शिव ने सभी जगहों पर भैरव को बैठाया था. देवघर में माता का हृदय गिरा था,इसलिए इसे हृदय पीठ या शक्ति पीठ की भी मान्यता है. इस हृदय पीठ की रक्षा के लिए भगवान शिव द्वारा जिस भैरव को बैठाया गया था,वही बैद्यनाथ हैं. जानकारों के अनुसार इसी भैरव के नाम पर बैद्यनाथ नाम इस ज्योर्तिलिंग का पड़ा.

जहाँ सती का हृदय गिरा वहीं विष्णु ने शिवलिंग की स्थापना की

बोल बम और हर हर महादेव का जयघोष करते श्रावण में शिवभक्तों की बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धा देखते ही बनती है. जानकारों के अनुसार इस चराचर जगत के स्वामी जो पञ्च तत्व के भी स्वामी होते हैं वही बैद्यनाथ कहलाते हैं. शास्त्रों के अनुसार आत्मलिंग से जिन बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव हुआ उनमें बैद्यनाथधाम स्थित पवित्र ज्योतिर्लिंग को मूल लिंग माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग मे शिव के अनन्य भक्त रावण द्वारा पवित्र शिवलिंग को लंका ले जाया जा रहा था तभी इसे लघुशंका लगी. जानकारों के अनुसार भगवान शिव ने रावण को आत्मलिंग देते हुए एक शर्त रखी थी कि जिस जगह यह जमीन से स्पर्श करेगी वही स्थापित हो जाएगा. रावण को जब तेज़ लघुशंका लगी तब पृथ्वी पर विष्णु जो भेष बदलकर चरवाहा का रूप धारण किये हुए थे उन्ही के हाथ मे शिवलिंग थमा कर रावण लघुशंका करने लगा. शिवलिंग भारी देख भगवान विष्णु के कर-कमलों द्वारा उसी पवित्र जगह पर शिवलिंग को स्थापित किया गया जहां माता सती का हृदय गिरा था. जानकारों के अनुसार इसकी पृष्ठभूमि सतयुग में ही तैयार हो गई थी. शास्त्रों में इसका उल्लेख भी किया गया है.

पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में बैद्यनाथधाम स्थित पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग की इसी महत्ता के कारण प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने 105 किलोमीटर की कष्टप्रद पैदल यात्रा कर बैद्यनाथधाम पहुंचते हैं और अपनी कामना की झोली भर कर वापस लौटते हैं.

रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 

Tags:Jharkhand newsDeoghar newsSawan 2025श्रावणी मेला 2025Dwadash Jyotirlinga BaidyanathBaba baidyanathबैद्यनाथ धामद्वादश ज्योतिर्लिंग

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.