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जोशीमठ में लोगों के विरोध के बाद रोका गया होटल गिराने का काम, 800 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त, भूस्खलन की आशंका बढ़ी

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 9:59:05 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): उत्तराखंड के डूबते शहर जोशीमठ में अधिकारियों ने बिल्डिंग गिराने की गतिविधियों को रोक दिया है. बुधवार को स्थानीय लोगों और होटल मालिकों का विरोध तेज हो गया. जिसके कारण ये फैसला लिया गया है. बता दें कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को अपना घर खोने पर मुआवजे के रूप में तत्काल 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे. उत्तराखंड के सीएम, पुष्कर सिंह धामी के सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि "723 घरों में दरारें आ गई हैं. अब कोई अन्य आवासीय संपत्ति नहीं तोड़ी जाएगी. सीबीआरआई की देखरेख में दोनों होटलों को सावधानी से तोड़ा जाएगा." उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों के लिए 1,50,000 रुपये की अंतरिम सहायता की घोषणा की है. साथ ही कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों को 50,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी."

भूस्खलन की आशंका बढ़ी

जोशीमठ में हल्की बारिश और चमोली जिले के सुनील क्षेत्र में बर्फबारी ने भूस्खलन की आशंका को हवा दे दी है. जानकारों का कहना है कि अगर जोशीमठ में भारी बारिश जारी रही तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है. विशेषज्ञों ने मिट्टी की क्षमता को बनाए रखने के लिए विशेष रूप से संवेदनशील स्थलों पर क्षेत्र में पुनर्रोपण का भी सुझाव दिया है.

जोशीमठ में विध्वंस की गतिविधियों के लिए बुलडोजर और भारी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा क्योंकि इससे झटके आ सकते हैं. विध्वंस की गतिविधि बड़े पैमाने पर हथौड़ों, ड्रिलरों और अन्य समान उपकरणों द्वारा की जाएगी.

उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित जोशीमठ में मंगलवार को दो जर्जर हो चुके होटलों को गिराए जाने से पहले विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. प्रदर्शनकारियों ने विध्वंस गतिविधियों के खिलाफ नारे लगाए क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि जिन लोगों की संपत्तियों को गिराया जाना था, उन्हें मुआवजा कैसे दिया जाएगा. बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान के तहत मुआवजे की मांग को लेकर होटल मालिक और स्थानीय लोग होटलों को गिराने के सरकार के कदम का विरोध कर रहे थे. जोशीमठ प्रशासन ने आज उन सभी अधिकारियों और होटल मालिकों की बैठक बुलाई है जिनकी संपत्तियों को तोड़ा जाना है. स्थानीय लोग और होटल मालिक मलारी होटल के पास धरने पर बैठ गए और मुआवजे के आश्वासन के बिना जाने को तैयार नहीं थे.

होटल गिराने का स्थानीय लोगों ने किया विरोध

मलारी इन और माउंट व्यू, दो अगल-बगल के होटल, खतरनाक तरीके से एक-दूसरे की ओर झुकना शुरू कर चुके हैं, जिससे उनके आसपास की मानव बस्तियों के लिए खतरा पैदा हो गया है. उत्तराखंड सरकार ने सोमवार को अस्थिर संरचनाओं को गिराने का निर्देश दिया, जिसकी शुरुआत इन दो इमारतों से हुई थी. लेकिन, जैसे ही राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) के जवान भारी मशीनरी के साथ साइट पर पहुंचे, होटल मालिक और अन्य प्रदर्शनकारी रास्ते में लेट गए.

स्थानीय निवासियों ने जोशीमठ के पहाड़ी शहर में बिना मुआवजे की घोषणा के उत्तराखंड प्रशासन द्वारा डूबते घरों और होटलों को गिराने का विरोध किया. विरोध प्रदर्शन मलारी इन होटल के बाहर हुआ, जिसे असुरक्षित चिन्हित किया गया था. होटल मलारी इन और अन्य असुरक्षित ढांचों को बुधवार को गिराया जाना है. प्रदर्शनकारी अचानक विध्वंस के कदम के लिए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.

800 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, चमोली द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के जोशीमठ में क्षतिग्रस्त घरों की संख्या 800 हो गई है. जोशीमठ नगर क्षेत्र में भूस्खलन के कारण कुल 800 भवनों में दरारें आ गई हैं और 131 परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है. उत्तराखंड के डूबते शहर जोशीमठ के स्थानीय लोग संकट के कारण गुस्से और निराशा के बीच एक अंधकारमय भविष्य की ओर देख रहे हैं. जोशीमठ में 344 राहत शिविर और 491 कमरों की पहचान की गई है. क्षेत्र में 86 घर असुरक्षित क्षेत्र के रूप में चिन्हित हैं. जिला प्रशासन ने डूबते शहर में रहने के लिए असुरक्षित घरों पर रेड क्रॉस के निशान लगा दिए हैं.

जोशीमठ में बारिश की आशंका ने बढ़ाया खतरा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जोशीमठ के लिए आज बारिश की भविष्यवाणी की है. जोशीमठ पर मंडरा रहे काले बादलों ने खतरे की घंटी बजा दी है. आईएमडी की भविष्यवाणी के अनुसार आज हल्की बारिश हो सकती है और कल मध्यम बारिश की संभावना है. बारिश जोशीमठ में भूस्खलन और भूमि धंसने के खतरे को और बढ़ा सकती है. यह जोशीमठ में पहले से ही क्षतिग्रस्त/कमजोर इमारतों को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है.

निवासियों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता

राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) ने मंगलवार को जोशीमठ में स्थिति की समीक्षा की, जहां इमारतों और अन्य संरचनाओं में दरारें दिखाई दी हैं और इस बात पर जोर दिया कि प्रभावित क्षेत्र में सभी निवासियों की पूर्ण और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए. कैबिनेट सचिव राजीव एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गौबा ने जोर देकर कहा कि कमजोर संरचनाओं को सुरक्षित रूप से ध्वस्त करने को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए. घरों, सड़कों और जमीन में बड़ी दरारें आने के बाद जोशीमठ को भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है.

16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जोशीमठ में संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 16 जनवरी को सूचीबद्ध किया. तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए 'लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्थान' हैं और सभी महत्वपूर्ण मामले इसमें नहीं आने चाहिए.

जोशीमठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा दायर याचिका का मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा के समक्ष उल्लेख किया गया था. एनटीपीसी ने इन दावों को खारिज कर दिया है कि जोशीमठ की स्थिति उसकी परियोजना से जुड़ी है. योग गुरु रामदेव ने राहत सामग्री के साथ दो ट्रक जोशीमठ भेजे हैं, जिनमें 2,000 से अधिक कंबल, खाद्य पदार्थ और दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं.

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