टीएनपी डेस्क (TNP DESK): CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम का इंतजार हर साल लाखों छात्रों को रहता है और इस बार भी उत्सुकता चरम पर है. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र Central Board of Secondary Education की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकेंगे. लेकिन सिर्फ अंक देखना ही काफी नहीं होता, यह जानना भी जरूरी है कि पास होने के लिए क्या नियम हैं और अगर कम नंबर आएं तो क्या विकल्प मौजूद हैं.
सबसे पहले पासिंग क्राइटेरिया की बात करें तो CBSE 10वीं में प्रत्येक विषय में कम से कम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होता है. इसमें थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट दोनों शामिल होते हैं. यदि किसी विषय में प्रैक्टिकल और थ्योरी अलग-अलग हैं, तो दोनों में पास होना जरूरी है. यानी किसी एक में फेल होने पर छात्र को उस विषय में असफल माना जाएगा.
अब बात करते हैं ग्रेस मार्क्स की. कई बार ऐसा होता है कि छात्र एक या दो विषय में थोड़े अंकों से पीछे रह जाते हैं. ऐसे मामलों में CBSE कुछ छात्रों को ग्रेस मार्क्स देने पर विचार करता है. हालांकि यह पूरी तरह बोर्ड के नियम और स्थिति पर निर्भर करता है. ग्रेस मार्क्स का लाभ केवल उन्हीं छात्रों को मिलता है जो बेहद कम अंतर से फेल होते हैं.
अगर किसी छात्र को ग्रेस मार्क्स से भी राहत नहीं मिलती, तो घबराने की जरूरत नहीं है. बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षा का विकल्प देता है. इस परीक्षा में छात्र केवल उसी विषय की दोबारा परीक्षा देता है जिसमें वह फेल हुआ है. आमतौर पर यह परीक्षा रिजल्ट जारी होने के कुछ समय बाद आयोजित की जाती है.
इसलिए छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे रिजल्ट के साथ-साथ इन नियमों को भी अच्छी तरह समझें, ताकि किसी भी स्थिति में सही निर्णय लिया जा सके और आगे की पढ़ाई में कोई बाधा न आए.